बाइफरकेशन कॉलोनी के कर्मचारी इन दिनों वन्यजीवों से भयभीत है। एक पखवाड़ा पहले बाघ ने कालोनी में घुसकर गाय को मार डाला था, वहीं पूर्व में एक कर्मचारी पर भालू ने हमलाकर उसे लहूलुहान कर दिया था। ऐसे में कर्मचारी अब रात को ड्यूटी करने से कतराते रहे हैं।सिंचाई विभाग की बाइफरकेशन कॉलोनी बराही जंगल के बीचोबीच है। हरदोई ब्रांच की दाई पटरी की ओर हेड वर्कर्स खंड शारदा नहर बरेली की द्वितीय सबडिवीजन की स्थाई कॉलोनी है। इसमें सिंचाईकर्मी परिवार समेत रहते हैं। नहर की बाई पटरी की ओर शारदा सागर प्रथम सबडिवीजन की अस्थाई कॉलोनी है। यहां दोनों सबडिवीजनों के सहायक व अवर अभियंताओं के आवास एवं सबडिवीजनल कार्यालय भी हैं, लेकिन कुछ वर्षों से यहां न तो कोई सहायक अभियंता रहता है और न ही अवर अभियंता। ऐसे में उनके आवास भूत बंगले बनकर रह गए हैं। देखरेख के अभाव में यहां बड़ी बड़ी घास व झाड़ी उग आई है। अभियंता जिला मुख्यालय स्थित अपने कैंप कार्यालय में बैठकर कामों को अंजाम दे रहे हैं।पिछले दिनों बाघ द्वारा क्षेत्र में कई लोगों को निवाला बनाने के बाद कर्मचारियों ने कॉलोनी की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। जिस पर हेडवर्कर्स खंड ने तार फेंसिंग तो कराई, लेकिन कर्मचारियों के मुताबिक वह काफी घटिया है और मात्र बजट ठिकाने लगाया गया है। शारदा सागर की अस्थाई कॉलोनी में तो वर्षों से कोई कार्य कराया ही नहीं गया। हालांकि पूर्व में दोनों विभागों के अभियंताओं के यहां न रहने पर वेतन रोकने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद में मामला निपटा लिया गया। वहीं करीब डेढ़ माह पूर्व कॉलोनी के एक सिंचाईकर्मी की गाय को बाघ ने अपना लिया लिया था। आक्रोशित कर्मचारियों ने अपने मवेशी व परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई। कर्मचारियों का कहना था कि यदि अभियंता यहां रहने लगे तो कालोनी के हालात बदल सकते हैं। कर्मचारियों ने डीएम से कॉलोनी के चारों ओर पावर तार फेंसिंग कराने की मांग की है। इधर क्षेत्र में पिछले दस दिन से भालू ने आतंक मचा रखा है। रात को जहां कर्मचारी हेड पर ड्यूटी करते हैं भालू भी वहीं आकर बैठ रहा है। कर्मचारी विजयपाल, गंगाराम आदि ने बताया कि पिछले साल रात को एक भालू पुल पर आ गया था। एक कर्मचारी ने तो नहर में कूदकर अपनी जान बचा ली, जबकि साथी कर्मचारी को भालू ने हमला कर उसे घायल कर दिया था। पुन: अब भालू ने दस्तक देते हुए आतंक मचाना शुरू किया है। ऐसे में कर्मचारी समूह बनाकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं।