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मुश्किल में किसान... बाघ-तेंदुए के खौफ के बीच फसल काटने की चिंता

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गांव जगत की इन्हीं सड़कों पर चहलकदमी करते हैं बाघ। - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत/अमरिया। अमरिया क्षेत्र के किसान इन दिनों फसल काटने को लेकर काफी चिंता में हैं। बाघ-तेंदुए के खौफ के कारण अमरिया के 25 गांवों के किसान समूह बनाकर खेतों में जाने को मजबूर हैं। वैसे तो अमरिया क्षेत्र के किसानों का जंगल से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। टाइगर रिजर्व का जंगल भी उनके घरों से 18 मील दूर है मगर इसके बावजूद किसानों को ठीक उसी तरह का डर रहता है, जैसे जंगल की सीमा से सटे गांवों के किसानों को। इसकी वजह है-आबादी क्षेत्र में वन्यजीवों की घुसपैठ। अमर उजाला की टीम ने कुछ ऐसे ही गांवों का दौरा कर उन किसानों से बातचीत की जो अपनी जान जोखिम में डालकर धान की फसल काटने को मजबूर हैं।
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उत्तराखंड सीमा से सटा अमरिया क्षेत्र पहला ऐसा इलाका है, जहां आबादी क्षेत्र में इंसानों के साथ बाघ और तेंदुए जैसे हिंसक वन्यजीव भी रहते हैं। वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में पहुंचने का सिलसिला वर्ष 2012 में विशनपुर इलाके से शुरू हुआ था, जो आज तक अनवरत जारी है। वर्तमान में यहां दस से अधिक बाघ और दो से तीन तेेंदुए प्रवास कर रहे हैं। हालांकि आबादी इलाके में रहने वाले बाघ कभी इंसानों पर हमलावर नहीं हुए, मगर हाल ही के दिनों में आबादी में आए तेंदुए पिछले चार महीनों से गांव वालों में दहशत फैलाए हुए हैं। अमरिया के ग्रामीणों के मुताबिक पहले की अपेक्षा अब बाघ और तेंदुओं के व्यवहार में परिवर्तन आ चुका है। अब वह ज्यादा हिंसक होने लगे हैं। पहली बार बाघ ने घर में घुसकर वहां पालतू कुत्तों और मुर्गों को अपना निवाला बना डाला। वहीं तेंदुआ अब तक कई मवेशी, पालतू कुत्तों और मुर्गों का निवाला बना जा चुका है।
खेतों में मंडराते हैं बाघ, कैसे काटे फसल
अमरिया में लगभग सभी गांवों के लोग खेती पर ही निर्भर हैं। इन दिनों धान की फसल पककर तैयार खड़ी है। कुछ जगह धान कट भी चुका है। बाकी फसल की अगले माह से कटाई होगी। अगले माह से गन्ने की कटाई भी शुरू हो जाएगी। क्षेत्र के किसानों को दोनों फसलों की कटाई को लेकर चिंता सताने लगी है। गांव जगत के किसानों ने बताया कि बाघ खेतों के आसपास या फिर सड़कों पर मंडराते रहते हैं। घर से बाहर निकलने पर हर किसी को अपनी जान का खतरा साफ नजर आता है। फसल को भी नियत समय पर ही काटना जरूरी है। वन विभाग का भरोसा छोड़ अब किसानों ने खुद ही समूह बनाकर फसल काटने का निर्णय लिया है। किसान दरांती के साथ अब लाठी-डंडे लेकर खेतों में पहुंचने लगे हैं। वहीं, बड़े किसान सुरक्षा के लिए कोई बंदूकधारी रखते हैं।
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तेंदुओं के पिंजरे में आने का इंतजार
वन विभाग ने अमरिया क्षेत्र में तेंदुओं को पकड़ने के लिए 25 अगस्त से ऑपरेशन तेंदुआ चला रखा है। सौ से अधिक कैमरे भी लगाए गए हैं। वन एवं वन्यजीव प्रभाग का दावा है कि तेंदुए को पकड़ने के लिए अलग-अलग स्थानों पर चार पिंजरे भी लगाए गए हैं, मगर महीनों के ऑपरेशन के बाद आज तक तेंदुए को पकड़ा नहीं जा सका। किसानों का आरोप है कि गश्त का जिम्मा चंद वनकर्मियों पर छोड़ रखा है। इन हालातों में तेंदुए को पकड़ना मुश्किल है।
किसान बोले
जान जाती है तो जाए, फसल तो काटनी ही है
बाघ के हमले से बचने के लिए ट्रैक्टर में छतरी और पीछे कल्टीवेटर जोड़कर खेतों में जाते हैं। मजदूरों को भी ज्यादा दिहाड़ी देनी पड़ती है। शाम के चार बजते ही काम बंद कर देते हैं।- सुखविंदर सिंह, जगत
मेरे पास ज्यादा जमीन नहीं है। जितनी है, उसी में मेहनत करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। खेतों में अक्सर बाघ से सामना होता है, मगर अब फसल काटने जाना भी तो मजबूरी है। - गुरपेज सिंह, जगत
बाघों के साथ अब तेेंदुए भी आ चुके हैं। शाम होने से पहले ही घरों में जाना पड़ता है। अगर घर आने में देर हो जाए जो रास्ते भर सांसें ऊपर-नीचे होती रहती हैं। जान का खतरा हमेशा रहता है। - अल्ताफ अहमद, नूरपुर
धान की फसल कटाई के लिए तैयार है, मगर कटाई के लिए मजदूर खेतों में जाने को तैयार नहीं है। अकसर तेंदुआ खेतों के आसपास घूमता दिखाई देता है। कौन अपनी जान पर खेलकर धान की फसल काटे। - मुख्तार अहमद, तिरकुनिया नसीर
यहां रहने वाले बाघों का स्वभाव भी बदल चुका है। अब धारणा बदलनी होगी कि बाघ इंसानों पर हमलावर नहीं है। एक घर में भी बाघ घुस गया था। बाघों को जल्द ही ही आबादी से हटाना होगा। देरी होने से बड़ा हादसा सकता है।- सुमनप्रीत सिंह, जगत
तेंदुए को पकड़ने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। चार पिंजरे भी लगाए गए हैं। वन कर्मियों को निगरानी पर भी रखा गया है। बाघों की शिफ्टिंग का मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है। किसान समूह बनाकर ही खेतों में जाएं।
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संजीव कुमार, डीएफओ वन एवं वन्य जीव प्रभाग
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