अमरिया(पीलीभीत)। इलाके में पिछले पांच महीने से बाघ और तेंदुए की दहशत बरकरार है। शुक्रवार रात सूरजपुर गांव में चहारदीवारी फांदकर एक घर तेंदुआ घुस आया। परिवार वालों ने शोर-शराबा भी किया मगर तेंदुआ कुत्ते को मुंह में दबाकर गन्ने के खेत की ओर भाग निकला। वहां उसने कुत्ते को निवाला बना डाला। वन विभाग की टीम ने मौका मुआयना कर निशान ट्रेस किए। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में खौफ है।
तहसील अमरिया क्षेत्र के गांव सूरजपुर निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे उनके परिवार वाले आंगन में बैठे थे। इसी बीच खेतों की ओर से तेंदुआ दीवार फांदकर घर में घुस आया। उसने आंगन में घूम रहे पालतू कुत्ते पर हमला कर दिया। घर में तेंदुए को देखते ही सबके होश उड़ गए। तेंदुए को भगाने के लिए परिवार के लोगों ने शोर शराबा भी किया, मगर तेंदुआ कुत्ते को मुंह में दबाकर दीवार कूदकर परमवीर सिंह पैरी के गन्ने के खेत में ले गया। वहां उसने कुत्ते को अपना निवाला बना डाला। सूचना के बाद भी रात में वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। दहशत के चलते परिजन पूरी रात जागते रहे। शनिवार सुबह टाइगर ट्रैकर चेतन कुमार और राजीव ढाली ने मौके पर पहुंचकर पैरों के निशान ट्रेस किए। दोपहर के बाद वन दरोगा रामाधार, शैलेंद्र कुमार एव लखनऊ से पहुंचे एक्सपर्ट जाफर वारसी ने जानकारी जुटाने के साथ मौका मुआयना किया।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि तेंदुआ कुछ माह पहले इसी तरह दीवार फांदकर उनके एक अन्य कुत्ते को निवाला बना चुका है। इस घटना के बाद उन्होंने चहारदीवारी को ऊंचा करा दिया था। इसके बाद भी तेंदुए ने चाहरदीवारी कूदकर दूसरे कुत्ते को अपना निवाला बना डाला। तेंदुए के आतंक से 15 गांवों के लोग परेशान हैं। हालांकि तेंदुआ को पकड़ने के लिए 25 से आपरेशन तेंदुआ चलाया गया था, मगर अभी तक तेंदुए को नहीं पकड़ा जा सका है।
‘शुक्रवार शाम आठ बजे खेतों में धान कटवाने के बाद मोटर साइकिल से घर वापस लौटा था। उसी समय तेंदुआ गांव में बिल्लू के मकान के किनारे खड़ा था। तेंदुआ देखकर मेरे तो पसीने छूट गए। मोटर साइकिल तेजी से दौड़ाकर निकल गया।’ - पम्मा सिंह, किसान
‘वन कर्मी तेंदुए को पकड़ने के लिए घरों के पास पिंजरे लगा गए थे मगर चालाक तेंदुआ पिंजरों के पास फटका भी नहीं। हालांकि वन विभाग ने भी सिर्फ गुमराह ही किया है। क्योंकि पिंजरा चारों ओर से बंद कर दिया जाएगा, तो जानवर उसमें कैसे पहुंचेगा।’ - राजेंद्र सिंह, गृह स्वामी