पीलीभीत। राजनीतिक विवादों के बीच जिला पंचायत में 25 करोड़ के कामों के टेंडर देर शाम खोल दिए गए। जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र की तीसरी बार डाले गए टेंडर निरस्त करने के लिए लिखी गई चिट्ठी बेकार चली गई। सीडीओ ने परीक्षण में अध्यक्ष की चिट्ठी को नियम संगत नहीं माना। उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिस तरह से केवल छह ठेकेदारों ने काम हथिया लिए हैं, उससे शासन की मंशा पूरी नहीं हुई, इसलिए वह जल्द ही कोर्ट की शरण में जाएंगी।
जिला पंचायत में 25 करोड़ रुपए के काम हथियाने को लेकर सपा और भाजपा में लंबे समय से खींचतान चल रही है। जिला पंचायत के पुराने ठेकेदारों की जुगलबंदी में भाजपा के कुछ बड़े नेता भी शामिल हो गए। इसके चलते किसी भी विभाग में पंजीकृत ठेकेदार द्वारा जिला पंचायत में टेंडर डालने के मसले पर दो बार पहले टेंडर निरस्त हो चुके हैं। तीसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष ने स्वयं टेंडर निरस्त करने के लिए चिट्ठी लिखी थी। मगर, सोमवार देर शाम अध्यक्ष की चिट्ठी को नियम संगत न मानकर सीडीओ श्रीनिवास मिश्र और अपर मुख्य अधिकारी जागन सिंह ने टेंडर खोलने की घोषणा कर दी। सीडीओ ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपनी चिट्ठी में जो भी बिंदु उठाए हैं, वे उस समय क्यों नहीं उठाए गए, जब तीन बार ़उसका विज्ञापन प्रकाशित कराया गया। सीडीओ ने कहा कि टेंडर निरस्त करने का अधिकार केवल मंडलायुक्त को है।
फिलहाल, सभी टेंडर खोल दिए गए हैं। दूसरी ओर जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र का कहना है कि जिला पंचायत के टेंडर खोलने में बड़े पैमाने पर अनयिमितमाएं बरती गईं। डमी ठेकेदारों के नाम पर असलियत में केवल छह ठेकेदारों ने सारे टेंडर हथिया लिए हैं। इससे सरकार की ज्यादा ठेकेदारों के बीच कंप्टीशन कराकर टेंडर खोलने की मंशा पर पानी फिर गया। वह यह अन्याय नहीं होने देंगी। कुछ ठेकेदार मंडलायुक्त से मिलने गए हैं। बोलीं-मैं जल्द ही इस मुद्दे को लेकर कोर्ट जाऊंगी।