बीसलपुर। अफसर भले ही तमाम दावे करें मगर सहकारी गन्ना विकास समिति क्षेत्र के कई गांवों के 10 हजार से अधिक किसान अब भी गन्ना पर्ची के लिए भटक रहे हैं। उन्हें दो माह बाद भी गन्ना पर्ची मुहैया नहीं सकी है। वहीं गन्ना समितियों के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में गलती किसानों की ही है। सर्वे के दौरान इन किसानों से उनके मोबाइल नंबर और बैंक खाते की डिटेल मांगी गई थी तो उन्होंने मुहैया नहीं कराई थी।
सहकारी गन्ना विकास समिति क्षेत्र में किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल बरखेड़ा, द्वारिकेश चीनी मिल फरीदपुर, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर, डालमियां शुगर मिल निगोही और एलएच चीनी मिल पीलीभीत के 62 गन्ना क्रय केंद्र संचालित हैं। समिति में पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली जिलों के करीब छह सौ गांवों के 1.10 लाख किसान गन्ना सदस्य हैं। इनमें से 82 हजार किसान समिति के माध्यम से इन चीनी मिलों को गन्नापूर्ति करते हैं।
समिति अभिलेखों के अनुसार, 82 हजार में से चार हजार किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने अपने मोबाइल नंबर समिति कार्यालय में जमा ही नहीं किए हैं। छह हजार किसान ऐसे हैं, जिन्होंने अपने बैंक खाता नंबर समिति कार्यालय में जमा नहीं किए हैं। नए शासनादेश के तहत जिन किसानों के मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर समिति कार्यालय में फीड नहीं होंगे उन किसानों को गन्ने की पर्चियां नहीं मिलेगी। इस समिति क्षेत्र में नवंबर से गन्ना सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन इन 10 हजार किसानों को अब तक गन्ने की एक भी पर्ची नहीं मिल सकी है।
गन्ना पर्यवेक्षकों ने सर्वे के दौरान किसानों से संबधित प्रपत्र पर अपने मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर दर्ज करने को कहा, मगर 10 हजार किसानों ने सुझाव ठुकरा दिया। लिहाजा ये 10 हजार किसान दो माह बीत जाने के बावजूद गन्ने की पर्चियां पाने से वंचित हैं।
गन्ने की पर्चियों से वंचित सभी 10 हजार किसानों से फोन और बैंक खाता नंबर मांगे गए हैं। इसके मिलते ही गन्ने की पर्चियां किसानों को निर्गत कराई जाएंगी।
- आरपी कुशवाहा, सचिव सहकारी गन्ना विकास समिति बीसलपुर