पीलीभीत। अपने बच्चे को सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की बात करते ही कुछ लोग नाक भौं सिकोड़ने लगते हैं। मतलब, प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने का मतलब सिर्फ यही रह गया है कि जब कोई दूसरा रास्ता न बचे तो वहां पढ़ाओ क्योंकि प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में पढ़ाई की सामाजिक साख अच्छी नहीं है। मगर, प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में कुछ शिक्षकों ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर पढ़ाई में सुधार कराकर आम लोगों की इस धारणा को बदल दिया।
इन शिक्षकों की मेहनत के बल पर परिषदीय स्कूलों में कुछ स्कूल ऐसे बन चुके हैं, जो कान्वेंट स्कूलों की तरह चल रहे हैं। इनमें पढ़ने वाले बच्चे फटाफट अंग्रेजी भी बोलते हैं। किसी कान्वेंट स्कूल के बच्चे से ज्यादा गहराई से चीजों को समझते हैं। इसके पीछे छिपी है उन शिक्षकों की मेहनत, जिन्होंने अपने स्कूल को बेहतर बनाने के लिए कठोर परिश्रम किया। स्कूल में अपनी ओर से धन जुटाकर लैब बनवाई। अत्याधुनिक तरीके से वॉल पेंटिंग कराई। जो बच्चे स्कूल नहीं आते थे, उन्हें अभिभावक से बात करके स्कूल लाए और पढ़ाया। पूरी तरह गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन किया। इन शिक्षकों ने अपने स्कूलों में शिक्षा की नवीन तकनीकी का इस्तेमाल कर अपने बच्चों को इस लायक बनाया कि कान्वेंट स्कूल के बच्चों को टक्कर दे सकें। यह शिक्षक अब संपूर्ण शिक्षा जगत के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं।
ऑल इन वन प्रश्नोत्तरी बनाकर बच्चों को पढ़ाया
बरहा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक संतोष खरे की बेसिक शिक्षा में अपनी एक अलग पहचान है। उन्होंने साथी शिक्षकों के सहयोग से ऑल इन वन प्रश्नोत्तरी तैयार कर एक से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए पढ़ाई आसान की। इतना ही नहीं श्राबस्ती के शिक्षक प्रेम वर्मा के सहयोग से इन्होंने ई-संज्ञान एप पर इसका डिजिटलाइजेशन भी किया। शिक्षक संतोष के मार्गदर्शन में नौ बच्चे राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा, तीन बच्चे हिंदुस्तान ओलंपियाड में परचम लहरा चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य बच्चे राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी मेधा का लोहा मनवा चुके हैें। शिक्षक संतोष राज्य अध्यापक पुरस्कार, लोकमनी लाल अवार्ड, उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार समेत जनपद स्तर पर भी कई बार सम्मानित हो चुके हैं।
वर्कशीट बनाकर बच्चों को भारी बैग से दिलाई मुक्ति
पिपरिया अगरु गांव के मॉडल प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सय्यदा ने जब बेसिक शिक्षा की नौकरी में कदम रखा तो उन्हें गरीब बच्चों की आर्थिक तंगी बेहद खली। उन्होंने संकल्प लिया कि वह गरीब बच्चों के लिए कुछ ऐसा करेंगी, जिससे उनके स्कूल के बच्चे दूसरे बच्चों को देखकर हीनभावना का शिकार न बनें। उन्होंने इसके लिए निशुल्क वर्कशीट का निर्माण किया। इसमें सभी विषय समाहित किए। प्रोजेक्टर के माध्यम से शिक्षा को रुचिकर बनाया। साथी शिक्षकों के सहयोग से प्रधानाध्यापिका ने कक्षा दो से पांचवीं तक के लिए प्रतिदिन शिक्षण की योजना बनाई, जो पूरी तरह सिलेबस पर ही आधारित रहा। सय्यदा के नए प्रयोगों से अब गरीब बच्चों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान दिखती है।
ईंट-भट्ठे के मजदूरों के बच्चों में जगाई शिक्षा की अलख
वर्ष 2015 में बेसिक शिक्षा की नौकरी शुरू करने वाले सोनिल कुमार वर्तमान में बरखेड़ा ब्लाक के पिपरिया मंडन स्थित प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज प्रधानाध्यापक हैं। सोनिल कुमार ने जब स्कूल की कमान संभाली तो उस समय अधिकांश बच्चे स्कूल ही नहीं आते थे। वजह यह थी कि उनके अभिभावक ईंट भट्ठों पर मजदूरी करते थे। शिक्षा से उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। बच्चे भी इस काम में अपने पिता का हाथ बंटाते थे। शिक्षक सोनिल साथी शिक्षकों के साथ बच्चों के घर गए। स्कूलों में मातृ और पितृ सम्मेलन कराए। आखिर, उनकी मेहनत रंग लाई। नतीजा यह निकला कि बीते सत्र में स्कूल में बच्चों की पंजीकरण संख्या 325 पहुंच गई। आज ये बच्चे शिक्षा के प्रति इतने जागरूक हैं कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई मोबाइल फोन पर करते हैं। शिक्षक सोनिल और उनके साथी शिक्षक यूट्यूब चैनल और व्हाट्सएप के माध्यम से रुचिकर विषय पर वीडियो बनाकर भी बच्चों को पढ़ाते हैं।
यूट्यूब पर वीडियो अपलोड कर शिक्षा का बनाया रोचक
बरखेड़ा ब्लाक के बकैनियां दीक्षित गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाचार्य राजवीर सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में कई नए प्रयोग किए। इससे इनके स्कूल के ग्रामीण बच्चों का शिक्षा के प्रति रुझान लगातार बढ़ता ही गया। लॉकडाउन में बच्चे कहीं पढ़ाई से विमुख न हो जाए, इसके लिए उन्होंने एक्टिव टीचर क्रिएटिविटीज यूट्यूब चैनल के माध्यम से सभी विषयों से जुड़ा वीडियो बनाकर अपलोड किया। उनके ये वीडियो बच्चों के बीच खासी लोकप्रिय हैं। खास बात यह है कि अन्य शिक्षक भी अब उनकी वीडियो का अनुसरण करते नजर आ रहे हैं। इन्होंने वर्ष 2016 में मिशन शिक्षण संवाद समूह का गठन किया। इस समूह में आज लगभग 180 से भी अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं जुड़े है।