पीलीभीत। अमरिया निवासी बाबूराम (बदला हुआ नाम) जानलेवा एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी से ग्रसित हैं। बाबूराम का इलाज क्षय रोग विभाग से चल रहा है। हर बार बाबूराम को इसके लिए इंजेक्शन लगवाना पड़ता था। उसे अब तक 70 इंजेक्शन लग चुके हैं। इस कारण शरीर पर कई स्थान पर सूजन आ चुकी है, लेकिन अब बाबूराम जैसे दूसरे मरीजों को इंजेक्शन के झंझट से मुक्ति मिलने वाली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक टीबी को देश से खत्म करने का संकल्प लिया है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) को अब राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के रूप में तब्दील किया है। इधर, ब्लॉकों पर तैनात कर्मचारी गांवों में छिपे टीबी रोगियों को ढूंढकर इलाज कर रहे हैं। वहीं एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) रोगियों पर काबू पाने के लिए छह माह तक रोजाना इंजेक्शन लगता है। संज्ञान में आया कि लगातार इंजेक्शन लगने के कारण कुछ एमडीआर मरीज बीच में ही इलाज कराना छोड़ देते हैं। इसी वजह से टीबी खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियान को कोई सफलता नहीं मिल पा रही थी। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक इसकी जानकारी होने पर टीम जब मरीजों के घर पहुंचती थी तो लगातार इंजेक्शन लगने का हवाला देते हुए बीच में ही इलाज छोड़ने की बात कहते थे, जबकि टीबी रोगियों तय कोर्स तक इलाज दवा का खुराक और इंजेक्शन लेना है।
केंद्र सरकार ने टीबी रोग के जड़ से खात्मे के लिए नई व्यवस्था लागू की है। जिला क्षय रोग प्रशासन के मुताबिक टीबी मरीजों को तो पहले से कई दवाओं से छुटकारा दिलाते हुए नाममात्र की दवाएं दी जा रही हैं। इसे ओरल रेजीमन कहते हैं। वहीं अब एमडीआर मरीजों को इंजेक्शन के भय को देखते हुए बिना इंजेक्शन दवा से ही ठीक करने का निर्णय लिया है। ऐसे मरीजों को अधिक दिन तक दवा का खुराक लेना पड़ेगा। जिले में फरवरी में एमडीआर मरीजों का इलाज बिना इंजेक्शन से शुरू हो जाएगा।
जिले में करीब 1500 से अधिक टीबी के मरीज हैं, जिनका दवा चल रही है। मरीजों को लगातार दवा खाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी सरकार की ओर से दी जा रही है। वहीं करीब 180 एमडीआर रोगी भी हैं। जिनका जिला क्षय रोग अस्पताल से इलाज चल रहा हैै।
नेशनल स्टे्रेटिजिक प्लान (2017 से 2025 तक) के अनुसार टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कुछ मरीज दवा खाने में लापरवाही बरत रहे हैं। मरीजों की मॉनीटरिंग कराई जा रही है। अब एमडीआर मरीजों को इंजेक्शन नहीं लगेगा, सिर्फ दवा उन्हेें स्वस्थ किया जाएगा।
- डॉ. राजेश भट्ट, जिला क्षय रोग अधिकारी