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UP: पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सफारी गाड़ियों पर अब टैक्सी परमिट अनिवार्य, परिवहन विभाग ने जारी किया पत्र

Tue, 04 Nov 2025 10:02 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की सभी गाड़ियों के लिए टैक्सी परमिट अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में परिवहन विभाग ने पीटीआर प्रशासन को पत्र भेजा है। 
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की जंगल सफारी में दौड़ती गाड़ियों पर भी टैक्सी परमिट का नियम लागू होगा। पर्यटन के नाम पर सफारी चलाने वाले वाहन अब परिवहन विभाग के दायरे में आएंगे। विभाग ने इस संबंध में पीटीआर प्रशासन को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि सफारी में प्रयोग होने वाले सभी वाहनों को टैक्सी परमिट लेना होगा। 

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गौरतलब है कि पीटीआर की स्थापना के बाद पर्यटकों को जंगल सैर कराने के लिए सफारी वाहनों की व्यवस्था की गई थी। ये गाड़ियां अब तक गैर-व्यावसायिक श्रेणी में आती थीं, लेकिन परिवहन विभाग ने अब इन्हें टैक्सी श्रेणी में शामिल कर दिया है। एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने इस संबंध में पीटीआर को पत्र लिखा है। 

सफारी वाहनों के प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी 
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सैलानियों और सफारी वाहनों के प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। अब वीकडेज और वीकेंड पर अलग-अलग शुल्क लिया जाएगा। सैलानियों को पहले महोफ एक नंबर से बुकिंग करने में 2500 जिप्सी व 100 रुपये प्रति सैलानी की दर से रुपये जमा करने पड़ते थे। अब यह रेट सोमवार से शुक्रवार तक 2500 रुपये और प्रति व्यक्ति 100 से बढ़कर 120 कर दिया गया है। जबकि शनिवार और रविवार को यह रेट वाहन खर्च के अलावा 150 रुपये प्रति सैलानी के हिसाब से जमा करना होगा। 

इसी तरह मुस्तफाबाद के बुकिंग काउटंर से पहले जिप्सी वाहन के 2000 रुपये और प्रति सैलानी 100 रुपये जमा करने पड़ते थे। अब सोमवार से शुक्रवार तक प्रति सैलानी का खर्च 100 से बढ़कर 120 कर दिया गया है। जबकि शनिवार और रविवार को यह रेट प्रति व्यक्ति 150 रुपये जमा करना होगा। दोनों जगाहों पर जिप्सी और बड़े जीनान वाहन के रेट में पांच सौ रुपये का अंतर है। 
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सुबह की पाली में आधे घंटे की बढ़ोतरी 
जंगल सफारी के समय में आधे घंटे की बढ़ोतरी भी की गी है। सुबह की पाली में जहां पहले तीन घंटे का समय मिलता था, वहीं अब सैलानी साढ़े तीन घंटे तक जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। शाम की पाली पूर्ववत तीन घंटे की ही रहेगी। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तावित बजट पर भी चर्चा की गई जिसमें बाघ संरक्षण, ईको विकास, अनुसंधान और ईको टूरिज्म से जुड़े कार्यों पर व्यय का प्रस्ताव रखा। 

साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व की एकीकृत ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी सहमति बनी। इस अवसर पर इको-टूरिज्म पर आधारित एक फीचर फिल्म का भी विमोचन किया। वन मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व न केवल बाघों के संरक्षण का महत्वपूर्ण क्षेत्र है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन और स्थानीय आजीविका का भी मजबूत आधार है। उन्होंने रिजर्व में बढ़ते पर्यटन और संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।
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