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टाडा बंदियों की हत्या के मामले में गृहसचिव की आज हाईकोर्ट में पेशी

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पीलीभीत। वर्ष 1994 में जिला जेल में 10 टाडा बंदियों की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में प्रदेश के गृहसचिव बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में पेश होंगे। हाईकोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रुप से तलब किया है। उन्हें अपना स्पष्टीकरण भी दाखिल करना होगा। मामले की सुनवाई पर जनपदवासियों की निगाहें लगी है।
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पीलीभीत जेल में वर्ष 1994 में सैकड़ों टाडा बंदी निरुद्ध थे। इनमें पीलीभीत के अलावा उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के बंदी भी थे। नौ नवंबर 1994 की रात को कुछ टाडाबंदियों ने बैरक का जंगला काटकर भागने का प्रयास किया। उसके बाद जेलकर्मियों ने बैरक नंबर सात में निरुद्ध 28 टाडा बंदियों की बेरहमी से पिटाई की। इनमें से नौ बंदियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दसवें टाडा बंदी की इलाज के दौरान केजीएमसी लखनऊ में मौत हुई थी। टाडा बंदियों की मौत और पिटाई की खबर जेल से बाहर आते ही हड़कंप मच गया। तत्कालीन डीएम ने शासन से सीबीसीआईडी जांच की सिफारिश की। सपा अध्यक्ष ज्ञानी त्रिलोचन सिंह ने अज्ञात जेल कर्मियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जेल कर्मियों ने भी टाडा बंदियों पर फरार होने का लिखित आरोप लगाया। जेल वालों ने टाडा बंदियों के जूते चप्पल और सामान को भी आग लगा दी थी।
सीबीसीआईडी ने जांच के बाद जेल अधीक्षक विंध्याचल सिंह यादव, जेलर शंहशाह हुसैन जाफरी सहित 48 जेल कर्मियों पर हत्या समेत विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपी हाईकोर्ट चले गए। वहां मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगा दी गई। यह फाइल स्टे के आधार पर चलती रही। इस बीच प्रदेश में सपा की सरकार बनी और एक दशक पहले सरकार ने इस मुकदमे को वापस ले लिया। मुकदमा वापसी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। उस पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। जवाब दाखिल न करने पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति द्वय सुधीर अग्रवाल और राजीव मिश्रा ने 26 फरवरी को सुनवाई के दौरान इस बात पर आपत्ति जताई कि राज्य के प्रमुख सचिव गृह ने काउंटर शपथ पत्र दाखिल नहीं किया है। उन्हें हाईकोर्ट में पांच मार्च को यानी कि आज व्यक्तिगत रुप से तलब किया गया है। वह उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने का स्पष्टीकरण भी दाखिल करेंगे। हाईकोर्ट में गुरुवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण मुकदमे की सुनवाई पर टाडा बंदियों के परिवारों समेत समस्त जनपदवासियों की भी निगाहें लगी हुई हैं।
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