गन्ने की कटाई के बाद अक्सर किसान खेत में आग लगा देते हैं। इससे खेत और
गन्ने की ठूंठ में नमी कम हो जाती है और गन्ने की बढ़वार प्रभावित होती है।
इससे बचने को कटाई के बाद खेत की सिंचाई करनी चाहिए साथ ही यूरिया का
छिड़काव करना चाहिए।
जिला गन्ना अधिकारी रामेश्वर यादव ने बताया कि
गन्ने की ठूंठ (गन्ने काटने के बाद खेत में बचा तना) में नए कल्ले फूटने के
लिए नमी के साथ शर्करा की 72 प्रतिशत मात्रा होनी चाहिए, लेकिन अक्सर
गन्ने काटने के बाद खेत में आग लगा देते हैं। इससे एक ओर खेत में नमी की
कमी हो जाती है वहीं दूसरी ओर ठूंठ की शर्करा भी नष्ट हो जाती है। इससे
जमाव प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि गन्ने की कटाई के बाद खेत
में कभी भी आग न लगाएं और सिंचाई कर 25-30 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ के
हिसाब से छिड़काव करें। धूप अधिक तेज होने पर पूरे खेत में पत्तियां बिछा
दें जिससे नमी भी बनी रहेगी और खरपतवार भी नहीं उगेंगे। इसके साथ ही खेत
में खत्म हो चुके पौधो के स्थान पर नए पौधे लगाकर गैप फिलिंग अवश्य करें।
इससे उपज की बढ़ोत्तरी होगी।
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कीट नियंत्रण को करें स्प्रे
गन्ने
की फसल में कीट नियंत्रण के लिए 3-5 किलोग्राम यूरिया के साथ एक लीटर
क्लोरोपाइरीफास का घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें।
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पाइरिला कीट का प्रकोप बढ़ा
जिले
में गन्ने की फसलों पर पाइरिला कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे में किसान
नियमित खेत की जांच करें और इससे बचाव के लिए खेत में सिंचाई के अलावा
क्लोरोपाइरीफास का स्प्रे करें।