पंचायत चुनाव के बाद गांवों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। प्रतिदिन सौ से 150 मरीज निकल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सर्वेक्षण की ही बात करें तो जिले के सात ब्लॉकों के 1200 गांवों में 1372 लोगों में कोरोना के लक्षण मिले हैं जबकि पिछले 15 दिनों में 45 लोगों की जान चुकी है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में शहर के बाद अब ग्रामीण इलाकों में कोरोना रफ्तार पकड़ चुका है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में कोरोना का मुख्य सोर्स पंचायत चुनाव में बरती गई लापरवाही को माना जा रहा है। चुनाव के बाद स्वयं जांच करने वाले लोगों में 26 अप्रैल से 10 मई तक एक हजार से अधिक मरीज मिले हैं। शासन ने ग्रामीण इलाकों में पांच दिन डोर टू डोर सर्वे कराया था जिसमें अमरिया ब्लॉक में 306, ललौरीखेड़ा में 69,
न्यूरिया में 92, बरखेड़ा में 98, बीसलपुर में 237 बिलसंडा में 305 और पूरनपुर में 206 ग्रामीणों में ही सिर्फ कोरोना के लक्षण मिले थे, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।
हर घर में दो से तीन मरीज निकल रहे हैं, जो झोलाछाप से इलाज कर रहे हैं। बीसलपुर में चुनाव निपटाने के बाद 30 अप्रैल से 5 मई के बीच बौनी गांव में नौ लोगों की बुखार से जान जा चुकी है, जबकि सीएचसी स्तर पर इन मौतों को लेकर कोई भी जांच नहीं की गई। इसके अलावा मंगलवार को मोहल्ला दुबे निवासी पोथीराम राजपूत की 45 वर्षीय पत्नी राजरानी की बुखार से मौत हो गई।
गांव रोहनिया निवासी मंगली मियां की पत्नी 75 वर्षीय दन्नी बेगम और इसी गांव के मोहम्मद नवी की पत्नी 60 वर्षीय जहाना बेगम, गांव रसायाखानपुर निवासी 92 वर्षीय सफदर हुसैन चिश्ती, 75 वर्षीय असगर खां, 80 वर्षीय अब्दुल रऊफ चिश्ती और लुकमान की पुत्री 35 वर्षीय गुडिय़ा बेगम तेज बुखार से मौत हो गई। इधर, पूरनपुर ब्लॉक की बात करें तो पिछले पांच दिन में गांव सिरसा में पांच, घुंघचाई में चार और दिलबारपुर में दो लोगों की बुखार से मौत हो गई। इसी क्षेत्र के माधोटांडा कस्बे में भी 15 लोगों की बुखार से ही मौत हो गई। इस कारण लोग भयभीत हैं कि कहीं वह भी संक्रमण की जद में न आ जाएं।
यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद भले ही न हो, लेकिन जानकारी सभी को है, इसके बाद भी अभी तक ग्रामीण इलाकों में सैंपलिंग के लिए कोई कवायद शुरू नहीं की गई है, जबकि रोजाना दो से चार लोगों की मौत हो रही है। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि सर्वे करा लिया गया है। लोगों को खुद भी जागरूक होना चाहिए। फिलहाल जल्द ही सैंपलिंग कराई जाएगी।
सैंपलिंग होना बेहद जरूरी, वरना बढ़ सकता है संक्रमण
शहर के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आदित्य पांडे ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में लोगों मौतों की सूचना आ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को सभी का सैंपल करना चाहिए। खासकर जिनके परिवार में बुखार या किसी अन्य समस्या से मौत हुई है। उन परिवारों की जांच होना जरूरी है, क्योंकि वह लोग मोहल्ले या गांव के अन्य लोगों के संपर्क में आते हैं, ऐसे में अगर वह संक्रमित हुए तो एक व्यक्ति से कम से कम दस लोग संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए सैंपलिंग पर जोर देना चाहिए। साथ ही लोग भी लक्षण दिखने पर अपना सैंपल जरूर कराएं।