नाव से शारदा नदी को पार करते ग्रामीण। स्रोत ग्रामीण
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कलीनगर। शारदा नदी की बाढ़ का खतरा सीमा से सटे ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, भूरा, गोरख डिब्बी और रमनगरा क्षेत्र के ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ाए हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के पिलर नंबर 27 और 28 के बीच बसा यह इलाका बरसात में चारों तरफ पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो जाता है। नदी का पानी कब और किस तरफ से आबादी की ओर बढ़ आए, इसका कोई भरोसा नहीं रहता। यही वजह है कि ग्रामीण रात में भी जागकर पानी की स्थिति पर नजर रखते हैं।
इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में थारू जनजाति के परिवार रहते हैं। इसके अलावा पूर्वांचल और बंगाल से आए परिवार भी यहां बसे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस बार अभी तक आबादी में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन हर वर्ष यहां बाढ़ का संकट खड़ा हो जाता है। कई परिवारों को घरों में पानी भरने पर घास-फूस के छप्परों या ऊंचे स्थानों पर रात और दिन गुजारने पड़ते हैं। मवेशियों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
शारदा पार बसे इन गांवों तक बरसात में पहुंचने का एकमात्र साधन नाव है। सुरक्षित स्थानों से ग्रामीणों को चौड़ी शारदा नदी की धार पार कर अपने घरों तक जाना पड़ता है। घर-गृहस्थी का सामान पहुंचाना हो, खेतों पर जाना हो या मजदूरी करने वाले लोगों को काम पर पहुंचना हो, नाव के बिना कोई रास्ता नहीं है। शाम को मजदूर इसी रास्ते से वापस लौटते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी पार जाने वाली नाव का हर वर्ष टाइगर रिजर्व की ओर से ठेका होता है। ग्रामीणों को नाव से आने-जाने के लिए खर्च उठाना पड़ता है। एसडीएम प्रमेश कुमार ने बताया कि टीमें अलर्ट हैं। ग्राम प्रशासक और कोटेदारों को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। संवाद