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अचानक पहुंचीं डीएम खुली पढ़ाई की पोल

Sat, 23 Jul 2016 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो भावलखेड़ा /शाहजहांपुर।
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पोल ख्‍ाुली - फोटो : अमर उजाला
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- एक शिक्षिका निलंबित, पांच का वेतन रोक ा और तीन शिक्षिकाओं को प्रतिकूल प्रविष्टि
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डीएम पुष्पा सिंह शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे भावलखेड़ा ब्लॉक के कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पठन-पाठन की जमीनी हकीकत जांचने पहुंचीं तो पूरी पोल खुलकर सामने आ गई। पंजीकृत संख्या की तुलना में काफी कम ही बच्चे स्कूल में मिले, जो मिले भी उनमें से कोई हिंदी तक नहीं पढ़ पाया तो कोई पहाड़ा भी नहीं सुना पाया। हालत यह बने कि एक स्कूल में डीएम ने खुद ही टीचर बनकर बच्चों को पढ़ाकर मौजूद शिक्षिकाओं को पढ़ाने का आत्मीय अंदाज समझाया। सही पठन पाठन की स्थिति न मिलने पर उसके लिए जिम्मेदार पाई गईं तीन शिक्षिकाओं को प्रतिकूल प्रविष्टि दी तो अकारण नदारद मिलीं पांच के वेतन रोकने का आदेश दिया और बेवजह बहस कर रही प्राथमिक विद्यालय अटसलिया की शिक्षिका मीरा सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। 

केस वन
साढ़े आठ बजे सफाई होगी तो पढ़ाई कब होगी
भावलखेड़ा /शाहजहांपुर। डीएम सुबह सबसे पहले उच्च प्राथमिक विद्यालय अटसलिया पहुंचीं। वहां उस समय सफाई कर्मचारी द्वारा झाडू़ लगा रहा था। डीएम ने पूछा कि साढ़े आठ बजे सफ ाई होगी तो पढ़ाई कब होगी। इस पर शिक्षिकाओं में चुप्पी छा गई और उनसे कोई जवाब देते नहीं बना। स्कूल में प्रधानाध्यापिका मुन्नी देवी आर्य, रश्मि सक्सेना, साइमा तरन्नुम उपस्थित रहीं। दपिन्दर कौर व निकहत परवीन स्काउट गाइड में संबद्ध पायी गईं। विद्यालय में कुल 60 में से 20-20 बच्चे उपस्थित पाये गये। इनमें कक्षा छह में आठ, कक्षा सात में पांच, कक्षा आठ में सात बच्चे ही हाजिर मिले। बच्चों से किताब पढ़वाई तो पाया कि वह शुद्ध हिंदी नहीं पढ़ पा रहे। डीएम ने शिक्षिकाओं को न पढ़ाने का कारण पूछा तो वह कुछ बता नहीं सकी। 
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केस टू
15 दिन में पढाई न सुधरी तो 
बर्खास्तगी की कार्यवाही होगी
भावलखेड़ा / शाहजहांपुर। प्राथमिक विद्यालय अटसलिया में पठन-पाठन की स्थिति बेहद खराब मिली। कक्षा चार की रजनी, कक्षा तीन की रंजना और कक्षा दो के इंद्रसेन आदि एक अक्षर भी नहीं पढ़ सके। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए शिक्षिका मीरा सिंह, नम्रता मिश्रा, जुवैदा खातून को प्रतिकूल प्रविष्ट देने के निर्देश दिए। शिक्षिका मीरा सिंह द्वारा अनावश्यक बहस करने तथा अपने शैक्षिक कार्य में रुचि न दिखाने पर निलंबित कर दिया गया। डीएम ने अटसलिया के दोनों विद्यालयों की शिक्षिकाओं को कड़े लहजे में कहा कि जो कक्षा पांच का बच्चा आज सही हिंदी नहीं पढ़ पा रहा है, तो उसका आगे चलकर भविष्य क्या होगा और इसी पढ़ाई पर क्या वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेगा? कहा कि में 15 दिन बाद फिर स्कूल आऊंगी और पढ़ाई में सुधार नहीं मिला तो यहां तैनात सभी शिक्षिकाओं की सेवा से बर्खास्तगी की कार्यवाही कराई जाएगी। 


केस थ्री
पढ़ाने के लिए वेतन 
लेकर भी नहीं पढ़ाते? 
भावलखेड़ा / शाहजहांपुर। फिर डीएम प्राथमिक विद्यालय जमुका प्रथम एवं द्वितीय पहुंचीं। जमुका प्रथम में प्रधानाध्यापिका सरला देवी, शिक्षिका सीमा मिश्रा व अनुपम वर्मा मौजूद मिलीं। कक्षा चार की छात्रा रोज बानो, कक्षा पांच की रीता और कक्षा चार के छात्र हर्षित हिंदी भी नहीं पढ़ सके। यहां कक्षा एक में पंजीकृत 18 छात्रों में तीन, कक्षा दो में 33 में से नौ, कक्षा तीन में 26 में से 11, कक्षा चार में 27 में से आठ, कक्षा  पांच में 31 में से मात्र नौ बच्चे ही हाजिर मिले। इस पर डीएम का पारा उखड़ा। शिक्षिकाओं से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अच्छा खासा वेतन पढ़ाने के लिए ही दे रही है और वो भी यहां नहीं हो रहा जो कि शिक्षकों की रोजी-रोटी है। यदि अपने रोजी-रोटी से ही खिलवाड़ किया जायेगा तो भविष्य क्या होगा, यह शिक्षक स्वयं सोचें। प्राथमिक विद्यालय जमुका द्वितीय में अध्यापिका डॉ. शालिनी बिना अनुमति के अवकाश पर मिलीं तो उनका एक दिन का वेतन काटने का आदेश हुआ।  


केस चार
निगौना मकरंदपुर अपेक्षाकृत सही मिला
भावलखेड़ा / शाहजहांपुर। फिर डीएम रेलवे लाइन के किनारे स्थित जूनियर हाई स्कूल निगौना मकरंदपुर पहुंचीं। स्कूल में प्रधानाध्यापिका फरहत जहां हाजिर मिलीं, जबकि दो टीचर विभिन्न कारणों से गैरहाजिर मिलीं। बच्चों की हाजिरी अपेक्षाकृत सही मिली। यहां पठन-पाठन का स्तर भी ठीक मिला
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केस पांच
पड़रा सिंकदरपुर में डीएम बनीं टीचर
भावलखेड़ा / शाहजहांपुर। आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय पड़रा सिकंदरपुर के जांच में पाया गया कि विद्यालय में पंजीकृत कुल 257 बच्चों में करीब आधे से भी कम ही बच्चे आए हैं। कोई बच्चा हिंदी नहीं पड़ पाया। पांचवीं के बच्चों का भी यही हाल दिखा तो शिक्षिकाओं पर डीएम खूब बिफरीं। फिर खुद ही टीचर बन गईं और बच्चों को पढ़ाकर तैनात शिक्षिकाओं पढ़ाने के गुर सिखाए। डीएम ने बच्चों को पढ़ाकर कई बार उसी शब्द को दोहरवाया एवं लिखवाया। उन्होंने कहा कि जो बच्चे उच्च कक्षा में नहीं पढ़ पाये हैं उन्हें पिछली कक्षा की पढ़ाई कराकर परीक्षा लें और तब आगे की कक्षा में पढ़ाई करायें।   
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