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सुब्हान शाह बाबा का  तीन दिनी उर्स शुरू

Sun, 15 May 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
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बैठक। - फोटो : pilibhit, beureu
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खकरा पुलिस चौकी के निकट स्थित खानकाह पर हजरत अब्दुल सुब्हान शाह बाबा का 124 वां उर्स रविवार से शुरू हो गया। तीन दिन तक चलने वाले इस उर्स के पहले दिन आगरा समेत प्रदेश के कई जिलों से अकीदतमंदों ने पहुंच कर हाजिरी दी।
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रविवार सुबह नमाजे फज्र कुरआन ख्वानी के साथ उर्स का आगाज हुआ, जिसमें तिलावते की गईं। बाद नमाÁो जोहर महफिले नात सजाई गई। बाद नमाÁो इशा जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी मनाया गया। दरगाह के सज्जादा नशीन अल्हाज शम्सुÁÁामा सुब्हानी ने दरगाह पर प्रेसवार्ता में बताया कि सोमवार को बाद नमाÁो जोहर चादरपोशी का जुलूस निकाला जाएगा। जो शहर के मोहल्ला खकरा, भूरे खां, कमल्ले का चौराहा, जेपी रोड, आयुर्वेदिक कालेज होता हुआ हÁरत लुत्फुल्ला शाह वली के दरबार पर पहुंचेगा। वापसी में मोहल्ला डालचंद, फीलखाना, पकरिया होते हुए दरगाह सुब्हानियां पर सज्जादा नशीन की सरपरस्ती में चादरपोशी की जाएगी। मंगलवार को बाद नमाÁो फज्र बड़ा कुल शरीफ होगा। दूसरे कुल शरीफ की रस्म सुबह दस बजे से शुरू की जाएगी। जो दो बजे तक होगी। इस बीच मदरसा कादरिया सुब्हानियां से हिफ्Áा कुरान होकर मुकम्मल हुए हाफिजों की दस्तारबंदी साहिबे सज्जादा की सरपरस्ती में होगी। इस मौके पर दरगाह के सज्जादा अल्हाज शम्सुज्जमा, हाजी फरीद, यूसुफ, आफताब, शानू, सैय्यद नाजिम, दरगाह कानपुर के प्रबंधक हाफिज शहनवाज, खादिम हिमांयू शम्सी, नवेद सैफी, खुर्शीद अंसारी आदि मौजूद रहे।

पैदल हज यात्रा तय की थी सुब्हान शाह मियां ने
पीलीभीत। दरगाह के सज्जादा नशीन अल्हाज शम्सुज्जमा सुब्हानी ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान सुब्हान शाह मियां की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए बताया कि हÁरत सुब्हान शाह बाबा करीब 155 साल पहले नबी की मोहब्बत में पीलीभीत से हज यात्रा का पैदल सफर तय किया था। उस दौरान वह सबसे पहले खुदा का घर काबा शरीफ हाजिर हुए थे। लौटने के बाद उन्होंने लोगों को प्यार मोहब्बत से रहने का संदेश देना शुरू किया तो ब्रिटिश हुकूमत के लोगों ने उन्हें लोगों को भड़काने के शक में गिरफ्तार कर आगरा जेल में डाल दिया। जहां वह 13 माह तक रहे। जेल में भी मौजूद कैदियों को प्यार मोहब्बत का पैगाम देने लगे। खुदा के फजलों करम से उन्होंने वहां भी कुछ ऐसे करामात दिखाए जिसके बाद अंग्रेजी हुकूमत के लोग यह समझ गए कि वह कोई आम इंसान नहीं हैं। बल्कि रुहानी ताकत उनमे मौजूद है। जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। आगरा जेल से बाहर आने पर तमाम अकीदतमंद उन्हें अपने घर ले गए व उनसे मुरीद हुए। आज से ठीक 124 साल पहले वह पर्दा कर गए। उसके बाद से लगातार उनकी मजार पर यहां उर्स होता चला आ रहा है। जिसमे कानपुर, झांसी, पूना, मुराबाद, कंधौली, पलिया, बरेली, अलीगढ़ आदि स्थानों से तमाम अकीदतमंद पहुंच कर चादरपोशी करते हैं व मन्नते मांगते हैं। उन्होंने बताया कि सुब्बहान शाह, शाहजी मियां, लुत्फुल्ला शाह मियां एक ही पेड़ की शाख हैं।
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