पीलीभीत। शहर की गलियों में घूमते आवारा कुत्तों को पकड़वाने और उनकी नसबंदी की रूपरेखा भी नगर पालिका के जिम्मेदार तय नहीं कर सके हैं। पशुपालन विभाग से सामंजस्य कर नसबंदी की प्रक्रिया भी अभी सिर्फ बातों में हैं। वहीं कुत्तों के काटने की घटनाएं रोजाना सामने आ रहीं हैं। जिले में पिछले तीन साल में आवारा कुत्तों ने एक लाख से अधिक लोगों को काटा है।
शहर की गलियों और प्रमुख सड़कों पर आवारा कुत्ते घूमते नजर आते हैं। जिला अस्पताल में कुत्तों के काटने का इंजेक्शन लगवाने वालों की भी भीड़ जुटती है। यही हाल जिले के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का है। कस्बों में भी आवारा कुत्तों का आतंक है। मगर, नगर निकायों और पशु पालन विभाग के जिम्मेदार बेपरवाह हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जिम्मेदार सजग नहीं हुए हैं। शहर में घूमते कुत्तों की नसबंदी की रूपरेखा तक नहीं बन सकी है। जिम्मेदार कई दिन से पशु पालन विभाग से सामंजस्य कर नसबंदी शुरू कराने की बात कह रहे हैं। मगर, आवारा कुत्तों की नसबंदी अब तक शुरू नहीं हो सकी। नगर पालिका ईओ संजीव कुमार ने बताया कि पशुपालन विभाग से सामंजस्य कर जल्द ही कुत्तों की नसबंदी शुरू कराई जाएगी।
जिले में रोजाना औसतन 119 लोगों को काट रहे कुत्ते
जिले में कुत्ते का आतंक इतना बढ़ गया है कि औसतन रोजाना 119 लोगों पर हमला कर रहे हैं। बंदर और बिल्ली भी हमलावर हो रही हैं। तीन साल में एक लाख से भी ज्यादा लोगों पर कुत्तों ने हमला किया है। मगर अब तक प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।