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जन सहयोग बिना बाघ संरक्षण कामयाब नहीं: किदवई

Thu, 18 Dec 2014 06:28 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
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उन्होंने कहा कि कानपुर में जो बाघ पहुंचा है, उसके पीलीभीत टाइगर रिजर्व के होने की संभावना अधिक है।
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अमर उजाला से हुई वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना के बाद सपा विधायक हेमराज वर्मा ने बाघों की संख्या कम होने की बात कही थी। इसके पीछे कई कारण है। उन्होंने कहा कि गणना में कुछ तकनीकी गड़बड़ी भी हो जाती है। इसके अलावा गणना के दौरान कुछ बाघ खेतों या फिर नेपाल व उत्तराखंड के जंगलों में चले जाते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ बाघों की प्वाइजनिंग से मौत हुई है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व में स्टाफ की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। साफ किया कि डिप्टी डायरेक्टर के मुख्यालय को लेकर कोई विवाद नहीं है। इसकी जहां उपयोगिता होगी वहीं स्थापित किया जाएगा। वन विभाग ने टाइगर रिजर्व में जाने के जो इंट्री प्वाइंट निर्धारित किए हैं, उसमें सुरक्षा व संसाधनों की दृष्टि से माधोटांडा से बराही जाने वाले मार्ग को इंट्री प्वाइंट बनाया जा सकता है।
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वन राज्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर सरकार की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन जब तक जनता का सहयोग नहीं मिलेगा सफलता नहीं मिल रही है। बाघों को लेकर कोर एरिया का क्षेत्रफल कम है। कानपुर में जो बाघ पहुंचा है उसके पीलीभीत के टाइगर रिजर्व के होने की संभावना है। वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व के बाद सरकार एक इंच वन भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने देगी।
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