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साहब! बिना मैदान के कैसे खेलेगा इंडिया

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पीलीभीत। एक ओर शासन खेलों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। खेलेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया जैसे स्लोगन देकर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों की अनदेखी की जा रही है। खेलने के लिए मैदान न होने से गांवों की खेल प्रतिभाएं मायूस हैं। अमरिया और माधोटांडा क्षेत्र में भूमि चिह्नित होने के बाद भी खिलाड़ियों के लिए मैदान नहीं मिल सके हैं।
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अमरिया कस्बे को तहसील का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है। यहां युवाओं के खेलने के लिए ग्राम पंचायत में दो एकड़ भूमि तो चिह्नित की गई है, लेकिन स्टेडियम के लिए कोई प्रयास न होने से मैदान पर घास खड़ी है। लोगों का कहना है कि यहां कई खेल प्रतिभाएं हैं, लेकिन मैदान के अभाव के चलते निखार का मौका नहीं मिल रहा है। क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों का ध्यान भी इस ओर नहीं है। ग्राम प्रधान शीबा खान ने बताया कि वर्ष 2017 में तत्कालीन एसडीएम पुष्पा देवरार ने जूनियर हाईस्कूल की लगभग दो एकड़ से अधिक भूमि का मिनी स्टेडियम बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा था। जिस पर उस समय अमल भी हुआ था। दिल्ली खेल मंत्रालय से एक टीम ने यहां पहुंचकर भूमि का सर्वे भी किया था। उसके बाद से आज तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है।
माधोटांडा। क्षेत्र में युवाओं के खेलने के लिए कस्बे में इकलौता युवक मंगल दल खेल मैदान है। मैदान का दायरा करीब ढाई एकड़ से अधिक है। वर्ष 2001 में इसको मिनी स्टेडियम बनाने के लिए प्रयास शुरू किए गए थे। भूमि को ट्रांसफर भी कर दिया गया था। मगर लंबा समय बीत जाने के बावजूद बात आगे नहीं बढ़ी। मैदान जंगल झाड़ी में तब्दील हो चुका है। यही वजह है कि पहले कस्बे में राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता होती थी। आज सब बंद हो गया।
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युवाओं की बात

अमरिया कस्बे को तहसील का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन हम युवाओं के लिए एक भी खेल मैदान नहीं है। इस ओर कोई जन प्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में अपनी प्रतिभा को कैसे निखारें। - सैय्यद तौसीफ मियां

मैं मंडल स्तर तक क्रिकेट प्रतियोगिता में भाग ले चुका हूं। खेलों को बढ़ावा देने के लिए मात्र घोषणाएं की जा रही हैं। प्रतिभाओं को उभारने के लिए खेल का मैदान और खेलों का सामान जरूरी है। - सिकत्तर सिंह
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