वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के संयुक्त तत्वावधान में हुई गोष्ठी में विलुप्त हो रही गौरेया को बचाने और उसके संरक्षण पर जोर दिया गया। स्कूली बच्चों को 20 घोंसले भी सौंपे गए।
सार्वजनिक विद्या मंदिर रमनगरा में बुधवार को हुई गोष्ठी में वन क्षेत्राधिकारी हसीन अहमद ने कहा कि पहले गांवों कस्बों में छप्पर और खपरैल वाले घर होते थे। पेड़ भी बहुतायत में होते थे। तब गौरेया बहुतायत में थी लेकिन उसका ठौर-ठिकाना छिना तो उसके अस्तित्व पर संकट आ गया। सरकार ने गौरेया के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाया है। गौरेया संरक्षण को बीस मार्च को गौरेया दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने बच्चों से घरों में घोंसले बनाने और उन्हें दाना पानी देने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बच्चों को 20 घोंसले भी बांटें। इस मौके पर ग्राम प्रधान प्रशांत साना, आशीष राय, कंधईलाल आदि मौजूद रहे।