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एसपी साहब, बताइए कब बनेगा तोड़ा गया मंदिर!

Sat, 27 May 2017 11:05 PM IST
पीलीभीत
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सुनवाई - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूूरेेा
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बैठक करने पहुंचेे अफसरों से ग्रामीणों ने पूछा सवाल         
अफसर रह गए दंग, जांच की बात कहकर निकले       
    
   
 मंदिर विवाद को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच बनती जा रही दूरी को कम करने और शांति व्यवस्था की बहाली के लिए बांसबोझ गांव पहुंचे एसपी देवरंजन वर्मा सहयोग की अपील कर कुर्सी से उठे ही थे, कि भीड़ में शामिल एक वृद्धा ने एसपी से सवाल दाग दिया। बोली- मंदिर कब बनेगा? सवाल सुनकर पहले तो अफसर दंग रह गए। बाद में जांच की बात कह कर निकल गए। मातहतों ने गांव के लोगों को पूरी कार्रवाई की जानकारी देकर आश्वस्त किया।       
डीएम के निर्देश पर असम हाईवे पर सड़क के चौड़ीकरण और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत मंगलवार को सिद्धबाबा मंदिर तोड़ दिया गया था। जिसके बाद मंदिर निर्माण की मांग को लेकर गांव के लोगों ने जाम लगाकर प्रदर्शन किया। दूसरे दिन डीएम से वार्ता विफल रहने पर दोबारा आक्रोशित ग्रामीणों ने असम हाईवे पर जाम लगाया था। इसको रोकने पर पुलिस पर पथराव कर तीन बाइकों को फूंक दिया गया था। मामले में दर्जन भर लोग जेल भेजे जा चुके हैं। शुक्रवार को पुलिस की दबिश पर बर्बरता के आरोप लगने के बाद एसपी ने दबिश को रोक दिया। जिसके बाद गांव जाकर लोगों से शांति की अपील की जा रही है। इसी के तहत शुक्रवार रात बांसबोझ गांव में एसपी ने गांव के लोगों से चौपाल लगाकर बातचीत की। शनिवार को भी सीओ सिटी निशंाक शर्मा, इंस्पेक्टर हरगोविंद सिंह मीरपुर, पिपरा आदि गांवों में चौपाल लगाने पहुंचे। एक दिन पहले एसपी के समक्ष तो दूसरे दिन भी सीओ के सामने गांव के बुजुर्गों ने दोबारा कब मंदिर बनेगा, सवाल रख दिया। इस पर अधिकारियों ने जांच जारी होने की बात ग्रामीणों को बताई। इस दौरान गांव के लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देेने को कहा गया।       
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पुलिस की बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे ग्रामीण       
     
 पुलिस अधिकारी भले ही गांव-गांव जाकर लोगों को विश्वास में लेने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन दो दिन पुलिस की ताबड़तोड़ दबिशों का मंजर देख चुके ग्रामीणों में दहशत कम नहीं हो सकी है। अचानक पुलिस की कार्यशैली में आए बदलाव को लेकर ग्रामीणों में चर्चाएं तेज हैं। कोई साध्वी प्राची से बातचीत के बाद का असर मान रहा है। तो चर्चाएं इस बात को लेकर भी हैं, कि कहीं यह पुलिस की कोई चाल तो नहीं। ऐसे में अफसरों को पहले ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।       
पथराव और आगजनी के बाद से शुरू हुई पुलिस की कार्रवाई से घबराकर पिपरा, मीरापुरा गांव के अधिकांश लोग पलायन कर चुके हैं। अधिकांश घरों पर शनिवार को भी ताला लटका रहा। गलियां सूनसान पड़ी रहीं। शुक्रवार रात गांव में पुलिस की दबिश न पड़ने से लोगों को राहत मिली। लोग घरों के बाहर निकले, लेकिन गांव से निकलकर बाहर जाने की हिम्मत नहीं उठा सके। घरों के बाहर बैठकर पुलिस के बदले बरताव पर चर्चा होती रही। गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस के बदले व्यवहार से राहत मिलने के साथ ही मन में सवाल भी हैं। कहीं पलायन कर चुके लोगों को वापस बुलाते ही पुलिस उनकी गिरफ्तारी न कर ले और ग्रामीणों का आपस में ही विवाद ठन जाए। इसको लेकर डर बना है।       
     
अपने पहुंचे घर तो चेहरों पर लौटी मुस्कान       
शुक्रवार को पुलिस ने दबिश देकर पिपरा गांव से आठ लोगों को हिरासत में लिया था। इस दौरान घरों में तोड़फोड़, महिलाओं से मारपीट करने के आरोप दबिश देने आई पुलिस पर लगाए गए। गांव के लोगों का कहना था कि बेगुनाहों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनको फंसाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों में पुलिस की दहशत भी बढ़ती चली गई। पुलिस का सायरन सुनाई देने के बाद से गांव के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगती थीं। देर शाम हिरासत में लिए गए बसंतलाल, प्रेमपाल, त्रिमोहन, देवेंद्र समेत सात को पुलिस उनके परिवारीजनों के सुपुर्द कर गई। अपनों के घर वापस पहुंचने पर चिंता में डूबे परिवार वालों के चेहरे पर दोबारा मुस्कान आ सकी।       
  
नहीं थम रहा अफवाहों का सिलसिला       
माहौल को बिगाड़ने के लिए शरारती तत्व लगे हुए हैं। अफवाह फैलाकर शांति व्यवस्था में खलल डालने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। शुक्रवार को जेल भेजी गई गोमती की मौत की अफवाह फैलाई गई। जिसमें दो लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है। इधर देर रात पुलिस के गांव पहुंचकर तोड़फोड़ करने तो कभी ग्रामीणों के एकजुट होकर सड़कों पर उतरने की अफवाहें आती रहीं। शनिवार को भी आसपास के इलाकों में अफवाहों का बाजार खासा गर्म रहा।       
   
चौथे दिन भी सुरक्षा बंदोबस्त रहे सख्त       
बवाल के बाद से घटनास्थल एवं आसपास के गांवों को जाने वाले रास्तों पर पुलिस और पीएसी तैनात रही। शनिवार को भी पुलिस की तैनाती रही। जिले के दस थानाध्यक्ष, तीन सर्किल अफसर प्वाइंटों पर तैनात रहे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा रहा। एएसपी डा. रामसुरेश यादव राउंड लेकर फोर्स की मुस्तैदी को परखते रहे।       
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पुलिस पर भरोसा करें ग्रामीण: एसपी      
गांव के लोगों को पुलिस से डरने की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस की ओर से ग्रामीणों को परेशान नहीं किया जाएगा। जो लोग बाहर जा चुके हैं, वह भी वापस आ जाएं और पहले की तरह रहें। अफवाह पर ध्यान न दिया जाए। गांव-गांव जाकर पुलिस की कही हर बात पर ग्रामीण विश्वास करें।       
देवरंजन वर्मा, एसपी       
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