जिले के पुराने सपा नेता हारुन अहमद तीन जनवरी को विधिवत बसपा में शामिल हो जाएंगे। पूर्व मंत्री अनीस अहमद को बसपा से निष्काषित किए जाने के बाद बसपा में चल रहे घमासान के बीच मंगलवार को उन्होंने अपने आवास पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इसका खुलासा कर सभी को चौंका दिया।
जिला पुस्तकालय अध्यक्ष पद से वर्ष 1991 में वीआरएस लेने के बाद राजनीति में उतरे लोहिया विचार धारा वाले हारुन अहमद की गिनती कभी जिले के तेज तर्रार और संघर्षशील नेताओं में की जाती रही है। पहला चुनाव उन्होंने 1992 में सपा-बसपा गठबंधन में सपा टिकट पर लड़ा था और तीसरे नंबर पर रहे थे। इसके बाद एक और चुनाव वह सपा के टिकट व एक चुनाव सजपा से भी शहर सीट से लड़ चुके हैं।
पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान वह किसान नेता वीएम सिंह के साथ चले गए थे। इसके अलावा जिले में मजदूर व किसानों की लड़ाई के दौरान कई बार भाकपा (माले) के संघर्षों में भी वह उनके साथ आंदोलन में शामिल होते रहे हैं। पिछले कई सालों से वह किसी पार्टी में सक्रिय रूप से नहीं दिख रहे थे। मंगलवार को उन्होंने अपने आवास पर पत्रकारों को बुलाकर एकाएक बसपा में जाने का इरादा जता सभी को चौंका दिया।
हारुन अहमद ने कहा कि सपा गरीब व किसान विरोधी पार्टी है। प्रदेश में जंगलराज कायम है। उन्होंने कहा कि सपा की नीति व नीयत अलग-अलग हैं। यही वजह है कि पुराने सपाई होने के बावजूद वह इस पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हो रहे थे। उन्होंने बताया कि बसपा की नीतियों व सिद्धांतों से वह प्रभावित होकर तीन जनवरी को एक बड़े समारोह में बसपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
इस मौके पर बसपा के कुछ वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। उनकी इस घोषणा के समय बसपा के कुछ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। पूर्व मंत्री अनीस अहमद को बसपा से निकाले जाने के बाद से जिले में बसपा में मची उठा पटक के बीच हारुन अहमद की इस घोषणा को सियासी दल अपने-अपने नजरिये से देख रहे हैं।