पंचायत चुनाव में मतदान कर्मियों की तरह सिपाहियों को भी चुनावी भत्ता दिया जाना है लेकिन तीन चरण का मतदान होने के बाद भी सिपाहियों को भत्ता नहीं दिया गया। भत्ता न मिलने से सिपाही मायूस हैं मगर कार्रवाई के डर से वह इसकी शिकायत करने बच रहे हैं।
पंचायत चुनाव में सुरक्षा का दारोमदार सिपाहियों पर रहता है। बूथ कैप्चरिंग रोकने, फर्जी वोट रोकने, शांति व्यवस्थाएं बनाए रखने से लेकर तमाम काम सिपाहियों के जिम्मे हैं। चुनाव ड्यूटी करने पर सिपाहियों को भी मतदान कर्मियों की भांति भत्ता दिया जाने का नियम है। इसके लिए चुनाव आयोग से ही धनराशि उपलब्ध कराई जाती है लेकिन जिले में अब तक तीन चरणों को संपन्न कराने में ड्यूटी करने वाले सिपाहियों को अब तक मानदेय नहीं दिया गया है। इसके उलट चुनाव ड्यूटी करने वाले होमगार्ड्स को ड्यूटी समाप्त होने के साथ ही नकद भुगतान कर दिया। सिपाहियों की उपेक्षा कर होमगार्ड्स को भत्ता देने से सिपाहियों में मायूसी है। नाम न छापने की शर्त पर सिपाहियों ने बताया कि शासन से धनराशि मिलने के बाद भी उन्हें भत्ता नहीं दिया जाता है। सिपाहियों का कहना है कि अनुशासहीनता की कार्रवाई के डर से वह अधिकारियों से इसकी मांग भी नहीं कर सकते और इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उन लोगों को भत्ता नहीं दिया जाता है।
इस बाबत जानकारी करने पर चुनाव के नोडल अधिकारी/ एएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया सिपाहियों के मानदेय की धनराशि शासन से मिल चुकी है। चूंकि चुनाव ड्यूटी करने वाले अधिकांश सिपाही जिले के ही हैं इसलिए चारों चरण का चुनाव संपन्न होने के बाद सभी को एक साथ भत्ते का भुगतान करा दिया जाएगा।