वेलंटाइन डे मनाने वाले युवाओं के लिए यह खुशनुमा इत्तफाक ही है कि इस बार वेलंटाइन डे के अगले ही दिन विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान होना है। इसी वजह से हर साल वेलंटाइन डे के विरोध में लट्ठ लेकर निकलने वाले संगठनों को नए सिरे से रणनीति बनाने को मजबूर होना पड़ा है। चुनावी माहौल में दबंगई दिखाने से राजनीतिक दलों का कोपभाजन बनने का खतरा है लिहाजा इन संगठनों ने इस बार गांधीवादी ढंग से वेलंटाइन डे का विरोध करने का फैसला लिया है। वेलंटाइन डे का युवाओं में जितना क्रेज है, उससे कहीं ज्यादा उन्हें हिंदूवादी संगठनों का डर भी रहता है। हर साल इन संगठनों की टोलियां पार्क, रेस्टोरेंट सिनेमा हॉल जैसे उन सभी स्थानों पर धावा बोलकर वेलंटाइन डे मनाने वाले प्रेमियों को खदेड़ देती हैं जहां वे प्यार के इजहार के लिए इकट्ठे होते हैं। ये जोड़े कभी बदसलूकी के शिकार होते हैं तो कभी मारपीट तक बर्दाश्त करनी पड़ती है। लेकिन इस बार चूंकि चुनाव का मौसम है इसलिए विरोध करने वाले संगठन कोई खतरा उठाने को तैयार नहीं हैं। शिवसेना, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों ने इस मसले पर मंथन कर लिया है। ज्यादातर संगठन इस बार गांधीवादी ढंग से ही वेलंटाइन डे का विरोध करेंगे।