आल इंडिया बार काउंसिल के आह्वान पर जिले के अधिवक्ता कलमबंद हड़ताल पर रहे। अदालती कामकाज ठप रहा। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इससे पूर्व अधिवक्ता ज्ञापन सौंपने एडीएम के पास गए। चैंबर से बाहर न निकलने पर अधिवक्ताओं ने एडीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उप्र बार कांउसिल के पूर्व अध्यक्ष अजय शुक्ला ने बताया कि विधि आयोग ने अधिवक्ता अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन किया हैं जिसमें अधिवक्ताओं के विधि व्यवसाय पर शिकंजा कसा गया है और लोकतांत्रित कार्य करने पर भी वकालत का लाइसेंस निरस्त करने आदि का प्रस्ताव है। बार काउंसिल में भी अधिवक्ताओं के अलावा अन्य क्षेत्र के लोगों को सदस्य नामित करने जैसे संशोधन भी विचाराधीन हैं। अधिवक्ताओं ने इसे अधिवक्ता समाज की नहीं वरन संपूर्ण समाज को अपमानित करना बताया है। बार काउंसिल के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने कलमबंद हड़ताल की। दोपहर को ज्ञापन देने एडीएम के पास पहुंचे लेकिन वह काफी देर तक चैंबर से बाहर नहीं आए। इस पर अधिवक्ताओं ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। कहा एडीएम ने नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी की है। इसके बाद अधिवक्ताओं ने डीएम से मिलकर उन्हें प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा और प्रस्तावित संशोधनों को निरस्त करने की मांग की। संयुक्त बार के अध्यक्ष किशनलाल ने डीएम से कलेक्ट्रेट में एक धरना स्थल दिलाने को कहा। इस पर अधिवक्ता भवन के सामने धरना स्थल दिलाए जाने की बात डीएम ने की। हड़ताल पर रहने वालों में अध्यक्ष किशनलाल, महासचिवम महेश चंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष धीरेंद्र मिश्र, अवधेश मिश्रा, राजीव अवस्थी, अनिवाश मिश्रा, कुलदीप अवस्थी, सेंट्रल बार के अध्यक्ष संतराम राठौर, सचिव विमल वर्मा, शिव शर्मा, प्रेमशंकर शर्मा, संजय बरूआ, जामेंद्र पाल मौर्य, गिरीश चंद्र शर्मा, जयप्रकाश वर्मा, वीरेंद्र सक्सेना, अकील अहमद, लईक अहमद, शकील अहमद, युसुफ अली सिद्दीकी आदि थे।