पीलीभीत/ न्यूरिया। नेपाल के महेंद्रनगर और धनगढ़ी में रुके जिले के कामगारों के डर, दहशत और तनाव के दिन दूर हो गए हैं। हालात सामान्य होते ही जिंदगी तेजी से पटरी पर लौट रही है। चेहरे की मुस्कान भी वापस आ गई है। कामगारों ने काम पर जाना भी शुरू कर दिया। इधर, परिजनों की चिंता भी कम हो गई है। रोजाना व्हाट्सएप से बात कर कुशलक्षेम ले रहे हैं।
आठ सितंबर को पड़ोसी देश नेपाल का माहौल अशांत हो गया। उपद्रवियों ने सरकारी कार्यालय, जेल, भवनाें, बाजार में जमकर तोड़फोड़ की। आगजनी की घटनाएं भी हुईं। अराजकता बढ़ते ही बॉर्डर सील हो गया।
जिले के न्यूरिया और पूरनपुर तहसील क्षेत्र के सैकड़ों की संख्या में दैनिक मजदूर, राजमिस्त्री, बढ़ई आदि कामगार नेपाल के महेंद्रनगर और धनगढ़ी में फंस गए। काम-धंधा ठप हो गया। सुरक्षित रहने के लिए कामगारों ने खुद को कमरों में कैद कर लिया। शुरुआत के तीन दिन काफी दहशत में गुजारे।
हर आहट पर चौंक कर उठ खड़े होते थे। कर्फ्यू में छूट मिलने पर जरूरत का सामान खरीदकर कमरे पर ही खाना बनाते।
शनिवार से हालात सामान्य होने लगे। दोपहर दो बजे तक कर्फ्यू में छूट मिलने पर कामगारों ने कार्यस्थल पर पहुंचकर काम किया। रविवार को भी हालात सामान्य रहे। महेंद्रनगर और धनगढ़ी का बाजार खुला रहा। न्यूरिया निवासी राशिद ने बताया कि हालात सामान्य हो रहे हैं। वे लोग आज भी काम पर आए हैं। सड़कों पर काफी चहल-पहल दिखी। कामगारों ने वहां की फोटो भी साझा कीं। नेपाल में हालात सामान्य होने से कामगारों के परिजनाें के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई।