विरोधियों पर तीखी टिप्पणी करने वाले सपा नेता आजम खां गुरुवार को मोदी पर तो खूब बरसे, लेकिन समाजवादी पार्टी के अंदर मचे घमासान पर चुप्पी साधे रहे। कांग्रेस और बसपा को भी नहीं छुआ। मंच से उन्होंने सपा सरकार में मुस्लिमों के उर्दू टीचर बनाए जाने की बात कह मुस्लिमों को रिझाने की कोशिश जरूर की, लेकिन उनका अधिक जोर समाजवाद पर ही रहा।
आजम ने गुजरात के दंगों का जिक्र करते हुए अपने भाषण में नरेंद्र मोदी का नाम जरूर लिया, बाकी समय वह उन्हें देश का बादशाह की संज्ञा देकर तंज कसते रहेे। कहा कि भाजपा गाय, गंगा के बहाने हिंदू और मुसलमान को लड़ा रही है। आज भी अरुणांचल प्रदेश समेत आधे हिंदुस्तान में गाय के गोश्त का कारोबार हो रहा है। उन्होने कहा कि इस्लाम में बहते पानी को पाक कहा गया है। इसलिए मुसलमानों के लिए गंगा आज भी पवित्र है। उमा भारती के लिए गंगा इस लिए मैली हो गई क्योंकि उनके जेहन में गंदगी है। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने जब उनसे सपा में मचे घमासान और अमर सिंह पर सवाल किया तो वह बारीकी से उसे टाल गए। निकाले गए मंत्रियों के बहाली और सपा से निकाले गए एक नेता की मंत्रिमंडल से छुट्टी की संभावनाओं पर कहा कि वह मुख्यमंत्री के स्तर का मामला है। अमर सिंह पर हुए सवाल पर भी कुछ नहीं बोले।
मीडिया पर तल्ख टिप्पणी
आजम खां ने अपने भाषण में इलेक्ट्रानिक मीडिया से खासी नाराजगी जताई। भाजपा की तरफदारी का आरोप तो लगाया ही। साथ ही यह भी कहा कि वहां मौजूद इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों के बारे में कहा कि ये यहां इस लिए खड़े हैं, क्योंकि उनके पास कोई रोजगार नहीं है। जब कोई सरकार इन्हें रोजगार दे देगी, तब ये लोग यह काम करते नहीं दिखाई देंगे। उनके इस कथन की लोगों ने बाद में निंदा भी की।