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Pilibhit News: सिल्टिंग से शारदा डैम के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

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पीलीभीत। तमाम दावों के बाद भी प्रदेश के 10 से अधिक जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने वाले शारदा सागर डैम की जर्जर हालत में सुधार नहीं हो सका, जिसकी वजह से डैम के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। सिल्ट जमा होने के साथ ही डैम की मुख्य चहारदीवारी की पिचिंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में डैम में पानी ज्यादा दिन तक नहीं रोका जा सकता।
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कलीनगर तहसील के तराई इलाके में प्रथम पंचवर्षीय योजना में 22 किलोमीटर लंबा शारदा सागर डैम बनाया गया था। हालांकि इसकी ऊंचाई द्वितीय पंचवर्षीय योजना में बढ़ाई गई थी। उस दौरान समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 625 फुट मानी गई थी। डैम से जनपद के अलावा लखीमपुर खीरी, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली समेत दस जनपदों तक कृषि फैसलों में पानी की जरूरत को पूरा किया जाता है।
बरसों तक इस महत्वपूर्ण डैम की देखरेख पर खासा ध्यान रखा गया, मगर बाद में लापरवाही के चलते यह डैम साल दर साल जर्जर होता जा रहा है। तेज हवा के थपेड़ों के कारण पानी की लहरों से डैम की मुख्य चहारदीवारी के भीतरी हिस्से में सीमेंट और कंकरीट की ब्लॉक पिचिंग क्षतिग्रस्त होती जा रही है। हालांकि शुरूआत में क्षतिग्रस्त पिचिंग की मरम्मत भी कराई गई, मगर मरम्मत के दौरान न तो मानक के अनुसार निर्माण सामग्री और न ही पत्थर का उपयोग किया गया। कुछ समय बाद ही पिचिंग की कराई गई मरम्मत भी काम न आ सकी और नतीजा सिफर रहा। (संवाद)
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सिल्ट पटने से कम हुई भंडार की क्षमता

उत्तराखंड बनने के बाद डैम दो प्रांतों में बंट गया, मगर इसकी देखरेख की जिम्मेदारी आज भी उत्तर प्रदेश सरकार के पास है। शारदा सागर डैम की देखरेख दो सब डिवीजनों की जिम्मे है। दोनों खंडों के जिम्मेदार अभियंता लापरवाही बरत रहे हैं। आलम यह है कि डैम सिल्ट से पटने लगा है। इसकी हालत दिनों दिन दयनीय होती जा रही है।



दिनों दिन खस्ता हो रही डैम की हालत
शारदा सागर डैम की मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो डैम को लगातार पानी से नहीं भरा जा सकता। पूर्व सरकारों द्वारा डैम की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये का बजट दिया गया, मगर गंभीरता के बजाए बजट को ठिकाने लगाया जाता रहा। सीपेज ड्रेन भी चोक हो चुकी है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो एक न एक दिन डैम का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

सिल्ट पटान से घटी पानी की क्षमता
डैम की ऊंचाई वैसे तो 625 फुट है, लेकिन पहले इसमें 623 फुट तक ही पानी भरा जाता था। अब पानी डेड लेबल डैम पटने के चलते 608 फुट हो गया है, जो लगातार धीरे-धीरे घटता जा रहा है। बताते हैं कि जीरो से पांच किलोमीटर तक सिल्ट अधिक हो गई है। हालांकि अब भी कुछ समय तक के लिए डैम को 622 फुट तक ही भरा जाता है, लेकिन इसे जल्द ही खाली कर दिया जाता है।

केंद्रीय जल आयोग की टीम भी परख चुकी है हकीकत
शारदा डैम के जर्जर हालत को देखते हुए शासन की ओर से भारत सरकार के केंद्रीय जल आयोग को पत्राचार किया गया था। भारत सरकार ने इसको अपनी केंद्रीय ड्रिप योजना में शामिल कर पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था। वर्ष 2021 में गठित कमेटी की टीम ने मंडल के अफसरों के साथ शारदा डैम का स्थलीय निरीक्षण कर हालात परखे। जीरो से चार किमी तक डैम भंडार सिल्ट को देखा और कारण जाना, इसके अलावा जर्जर पिचिंग की स्थिति परखी थी, लेकिन सुधार की दिशा में अब तक कदम नहीं बढ़ाए जा सके।

शारदा डैम को केंद्र सरकार की ड्रिप योजना में शामिल किया गया है। परियोजना तैयार कर भेजी गई थी। इस पर सीडब्ल्यूसी से कुछ आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इसके बाद संशोधन कर परियोजना भेजी गई। विश्व बैंक की मंजूरी के बाद परियोजना पर अमर शुरू हो सकेगा। - बृजेश पोरवाल, अधिशासी अभियंता, शारदा सागर खंड
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