बिलसंडा। लिलहर गांव में स्थित करीब पांच हजार साल पुराने बाबा नीलकंठ मंदिर के सरोवर का अपना अलग महत्व है। मान्यता है कि यहां स्थित पवित्र चमत्कारी सरोवर में स्नान करने से कुष्ठ रोग खत्म हो जाता है। दूरदराज से बड़ी संख्या में लोग इस सरोवर में स्नान करने आते हैं।
जनश्रुति के अनुसार राजा मोरध्वज के बड़े भाई नीरजध्वज कोढ़ से पीड़ित थे। वह इसी स्थल पर एक गड्ढे के पास स्थित आंवले के पेड़ के नीचे बैठ गए, कुछ ही देर में उन्हें नींद आ गई। नीरजध्वज को सपने में भगवान ने दर्शन देकर कहा कि तुम इस गड्ढे को एक सरोवर में परिवर्तित कर दो तो तुम्हारा कोढ़ दूर हो जाएगा। बाद में नीरजध्वज ने ऐसा ही किया और उनका रोग दूर हो गया। उस पवित्र छोटे गड्ढे को उन्होंने बाद में एक विशाल सरोवर का रूप दिया। इसके बाद यहां शिवलिंग स्थापित किया, तभी से यह स्थान पवित्र नीलकंठ बाबा के नाम से जाना जाता है।
मान्यता है कि सरोवर में स्नान के बाद जो भक्त शिवलिंग के दर्शन कर जलाभिषेक करता है, उसके सारे कष्ट दूर होते हैं।
सिद्ध स्थल पर हर माह की अमावस्या को मेला लगता है। इसमें हजारों श्रद्धालु सिद्ध स्थल पर पहुंच कर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। सिद्ध स्थल पर मां काली, मां चंडी, भगवान शिव, राम-लक्ष्मण सीता सहित कई देवी देवताओं के मंदिर है।
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पानी की व्यवस्था के लिए लगा है एक नलकूप
विधायक रामसरन वर्मा ने सरोवर में गर्मी के समय पानी न होने की समस्या के लिए एक नलकूप की व्यवस्था कराई। गर्मियों में नलकूप से सरोवर में पानी की व्यवस्था कराई जाती है।
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रास्ता खराब होने से श्रद्धालुओं को होती है दिक्कत
गांव लिलहर के सिद्ध स्थल पर पहुंचने के लिए जर्जर सड़क से गुजरना पड़ता हैं। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंदिर पर अमावस्या के मेले पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वाहन को खड़े करने का कोई समुचित स्थान न होने से यहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।
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रुद्र महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने दी आहूति
बीसलपुर। गांव दियोरिया में चल रहे छह दिवसीय श्रीरुद्र महायज्ञ में बुधवार को पांचवें दिन रुद्र महायज्ञ और वेदी पूजन हुआ। कार्यक्रम यज्ञाचार्य अयोध्या प्रसाद शर्मा ने कराया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ स्थल की हाथ जोड़कर परिक्रमा की और मनोतियां मानी। श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या अधिक रही। दिनभर यज्ञ स्थल जयघोष से गूंजता रहा। यह यज्ञ श्रीरामचरित मानस मंडल के तत्वावधान में हो रहा है। संवाद