प्रदेश सरकार द्वारा दस हजार रुपए मानदेय देने के फैसले से आहत शिक्षामित्रों ने तीसरे दिन भी नारेबाजी कर धरना दिया। आंदोलनरत शिक्षामित्रों ने जनपद दौरे पर आए प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर दस हजार रुपए मानदेय का प्रस्ताव निरस्त कर मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
संयुक्त समायोजित शिक्षक/शिक्षामित्र समिति के बैनर तले जिले के शिक्षामित्रों द्वारा बीएसए कार्यालय परिसर में छह सितंबर से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इधर शुक्रवार को भी जिले के कई शिक्षामित्रों ने पहुंचकर बीएसए कार्यालय परिसर में नारेबाजी कर धरना दिया। धरना स्थल पर हुई सभा में प्रांतीय उपाध्यक्ष तीर्थदेव शर्मा ने कहा कि शिक्षामित्र निराश न होकर सकारात्मक सोच पैदा करें। शिक्षामित्रों ने जब-जब किसी समस्या को लेकर संघर्ष किया, जीत शिक्षामित्रों की ही हुई। हमें इतिहास से सबक लेते हुए अपना संघर्ष जारी रखना चाहिए। सभा में शिक्षामित्र/शिक्षक संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी विचार रखे। धरना देने वालों में जिलाध्यक्ष महेंद्रपाल वर्मा, हरिओम पांडेय, अमरदीप, रामवीर माथुर, जगदीश गंगवार, नरेंद्रपाल सिंह, जगदीश पटेल, सुमनबाला, जया गंगवार, कांता प्रसाद, भावना सक्सेना, पंकज शुक्ला, सर्वेश स्वर्णकार, सुरेश राठौर, गीता सक्सेना, हरीशंकर, आदर्श पटेल, साजिदा मंसूरी, चित्रलेखा, संध्या, कमला गंगवार, अनुपम शुक्ला, दीपमाला, अनीता सक्सेना समेत जिले के कई शिक्षामित्र शामिल रहे। शिक्षामित्रों ने बीएसए को ज्ञापन सौंपकर बकाया वेतन समेत अन्य समस्याओं का निराकरण कराने की मांग की। जिस पर बीएसए ने स्थानीय स्तर की समस्याओं का तत्काल निस्तारण कराने का आश्ववासन दिया। इधर शिक्षामित्रों के आंदोलन में शामिल होने के चलते जिले के कई परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था ठप हो गई। हालांकि महकमा दूसरे शिक्षकों को भेजकर पढ़ाई कराने का दावा कर रहा है।