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नेपाल की वमनी नदी शारदा में मिलकर बरपा रही है कहर

Sat, 30 Jul 2016 11:06 PM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
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flood
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 नेपाल की वमनी नदी इन दिनों शारदा में मिलकर खूब कहर बरपा रही है। वमनी नदी के पानी का दबाव शारदा में अधिक होने के चलते नदी रमनगरा बुझिया क्षेत्र में भू कटान करती हुई आगे बढ़ रही है। वहीं, नलडेंगा क्षेत्र में स्परों का कटान जारी है।
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शारदा नदी पर शारदा डैम व आबादी क्षेत्र को सुरक्षित रखने को पूर्व में बाढ़ खंड द्वारा नौजल्हा नंबर दो में नोमेंस लैंड से लेकर सनेढ़ी तटबंध तक जिओ ट्य़ूब का बांध व नगरियाखुर्द में 11 स्पर बनाए थे। इन सबके चलते यह इलाका तो सुरक्षित हो गया, लेकिन जहां पिछले वर्ष रमनगरा बुझिया में कटान हुआ था, वहां कोई बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए गए। अब यहां पर पिछले कई दिन से भूकटान जारी है। 
इधर, वमनी नदी के बाढ़ के पानी से शारदा नदी पिछले कुछ दिनों से रमनगरा बुझिया में दांये किनारे की ओर कटान जारी रखे हुए थी। शनिवार को वमनी नदी का जलस्तर कम होने के बाद शारदा ने अब बांये किनारे पर कटान शुरू किया है। इससे रमनगरा बुझिया के लोगों को कुछ राहत मिली है। यहां शनिवार को किसानों की परवल, गन्ना व धान सहित अन्य फसलों की भूमि का धीमी गति से कटान जारी रहा। बाढ़ की आशंका के चलते बुझिया निवासी ज्ञानेंद्र विश्वास ने भी अपने पक्के घर को तोड़ डाला और उसका मलबा डनलप में भरकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना शुरू कर दिया। बाढग़्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे राजस्व निरीक्षक ब्रजेंद्र राना व लेखपाल पूरन सिंह ने बताया कि बाढ़ से बेघर हो चुके रमनगरा बुझिया के आजम अंसारी को जल्द ही सहायता चेक दिया जाएगा। अन्य बाढ़ पीड़ितों की भी जल्द ही सूची बनाई जाएगी।
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नलडेंगा में स्पर का कटान जारी
नलडेंगा में शारदा नदी कुछ दिन पूर्व यहां बने डेढ़ सौ मीटर लंबे पत्थर के स्पर के आधे भाग का कटान कर चुकी है। इधर अब नदी ने शेष बचे भाग का लूप बनाकर कटान शुरू कर दिया है। इस स्पर से मार्जनल बांध मात्र 50 मीटर की दूरी पर है। यदि यह स्पर कटता है तो मार्जनल बांध को भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

देवहा में दस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा
पीलीभीत। डूनी डैम बैराज से देवहा नदी में शनिवार को दस हजार क्यूसेक पानी रिलीज किया गया। इससे नदी का जलस्तर बढ़ गया। नदी का जलस्तर बढ़ता देख निचले इलाके में रह रहे लोगों में खलबली मची हुई है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे हालात तो नहीं बने हैं, लेकिन बैराज से अधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया तो नदी का पानी निचले इलाकों में घुस सकता है।
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