पिछले वर्ष बाढ़ से तबाह हुई रमनगरा बुझिया में साल भर इंतजार के बाद बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू करा गए हैं। यह काम तब शुरू हुए जबकि इलाके में बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति आना शुरू हो गई है। वहीं कार्यों के नाम पर भी महज खानापूरी की जा रही है। चर्चा है कि बाढ़ खंड ने यह कार्य बजट के अभाव में मात्र जनता के आक्रोश को ठंडा करने के लिए शुरू कराए हैं। वर्ष 2016 शारदा नदी में आई बाढ़ के दौरान गांव रमनगरा बुझिया में भारी तबाही हुई थी। आबादी क्षेत्र समेत कई एकड़ कृषि भूमि नदी में समां गई थी। उस दौरान कहा गया था कि भू-कटान रोकने को बरसात बाद बाढ़ नियंत्रण कार्य करवाए जाएंगे, जो आज तक नहीं कराए गए। इधर अब बारिश के बाद शारदा नदी में भू-कटान होने लगा है। रमनगरा बुझिया में इस समय पानी का लेवल तो नदी के किनारे तक भरा हुआ है। पर अभी पानी के प्रवाह की गति काफी कम है, जिससे भू-कटान नाम मात्र का है। ऐसे में जब बारिश शुरू हुई तो बाढ़ खंड को यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने की याद आई है। बाढ़ खंड ने यहां 34 कटर बनाने की घोषणा की है।
बाढ़ नियंत्रण कार्य कछुआ गति से शुरू हुए हैं। ठेकेदार ने मात्र तीन कटर बनाने का कार्य शुरू किया है। पानी से रेत निकालने के लिए मड पंप लगाया गया है। आरोप है कि कटर में आधे अधूरे भरे बोरों को ही पानी में डाला जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शैलेश कुमार बजट न मिलने की बात कह रहे हैं। कुल मिलाकर यहां कार्य के नाम पर महज औपचारिकताएं ही निभाई जा रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि एक महीने पहले ही दो-दो लाख रुपये की लागत से मरम्मत कार्य के नाम पर पर दो सौ टेंडर आमंत्रित किए गए थे। उन्हीं में रमनगरा बुझिया के 34 कटर भी शामिल थे। ऐसे में यदि उस समय कार्य शुरू करा दिया जाता तो इस इलाके में सिल्ट जमा हो जाती और शारदा की मुख्य धारा इस किनारे पर नहीं आ पाती। जनप्रतिनिधियों समेत अन्य लोगों का कहना है कि यदि यहां पर युद्ध स्तर पर कार्य कराया जाए तो इस इलाके का भू-कटान रुक सकता है। कलीनगर के एसडीएम सूरज यादव भी मौके का एक दिन पहले निरीक्षण कर अभियंताओं से गुणवत्तापूर्ण और तेज गति से कार्य कराने के निर्देश दे चुके हैं।