शारदा पार इलाके के लोग इन दिनों अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से सफर कर रहे हैं। नाविक को मजबूरन क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के बाद नाव को रस्सी के सहारे लंबी दूरी तक पानी व रेत में खींचकर ले जाना पड़ रहा है। मालूम हो कि कुछ वर्ष पूर्व नाव का संतुलन बिगड़ने के चलते 14 नाव सवार लोगों की मौत भी हो चुकी है।
शारदा नदी के पार रमनगरा, गुन्हान, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र में करीब 300 परिवार रहते हैं। थारू जनजाति की बस्ती भी शारदा पार बसी है। शारदा पार बसे लोग नौ माह तक नाव से सफर कर रसद आदि का सामान लेकर जाते हैं। इस क्षेत्र के बच्चे भी नाव के सहारे ही इस पर पढ़ने आते हैं। वहीं, डैम की तलहटी में बसे लोग भी खेतीबाड़ी के लिए शारदा पार जाते हैं। यहां ग्राम समाज के अलावा करीब एक हजार एकड़ टाइगर रिजर्व की भूमि पड़ी है, जिस पर जिस पर थारू जनजाति, पूर्वांचल व बंगाली समुदाय के लोग अतिक्रमण कर खेती कर रहे हैं। इधर, इन दिनों शारदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। बाढ़ आने के बाद नदी की चौड़ाई भी बढ़ चुकी है। ऐसे में शारदा पार से आने वाले लोग घाट के ठेकेदार की नाव को रस्सी से बांधकर कम पानी व नदी के बीच में छोड़ी गई रेत में लंबी दूरी तय कर नाव को मुख्य धार में लाते हैं। नदी की चौड़ाई अधिक के चलते नाव शारदा नदी का मात्र एक चक्कर लगा पा रही है। ऐसे में अधिकांश लोग नाव में जबरन बैठने की कोशिश करते हैं। मजबूरन नाविक को न चाहते हुए भी नाव में क्षमता से अधिक सवारियां बिठानी पड़ रही हैं। इसके चलते कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। कुछ साल पूर्व इसी तरह सवारियों से भरी एक नाव संतुलन बिगड़ने से नदी में पलट गई थी, जिसमें नाव सवार 17 लोगों की मौत हो गई थी। नाविक बाड़ू कहते हैं वैसे तो कोई खतरा नहीं है, लेकिन सवारियां नाव में जबरन अधिक बैठने लगती हैं। नाव पार ले जाना मजबूरी होती है।