शारदा नदी ने जलस्तर में गिरावट के बावजूद अब टाइगर रिजर्व के बिजौरीखुर्दकलां जंगल को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। नदी करीब साढ़े पांच एकड़ जंगल क्षेत्र का कटान कर आगे बढ़ रही है। वहीं रमनगरा बुझिया में नदी शेष बची 25 एकड़ भूमि को भी धीरे-धीरे निगलती जा रही है। इधर बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता ने नगरिया खुर्द का दौराकर पुराने स्परों को मजबूत करने के निर्देश दिए।
शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट आने के बावजूद नदी का कटान बिजौरीखुर्दकलां में टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र में बढ़ता रहा है। इस जंगल क्षेत्र में एक ओर नेपाल की वमनी नदी और दूसरी ओर शारदा नदी कटान कर रही है। यहां पिछले तीन दिन में लगभग साढ़े पांच एकड़ जंगल क्षेत्र नदी में समां चुका है। जिसमें खैर, शीशम सहित विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों वृक्ष खड़े थे। जानकारों को मानना है कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ता है तो जंगल क्षेत्र का एक बड़ा भूभाग नदी की भेंट चढ़ सकता है। खास बात यह है कि जंगल क्षेत्र का बायां किनारा कटान से बचा चल रहा था, लेकिन अबकी बार नदी ने यहां पर भी कटान शुरू कर दिया है। इस जंगल में तीन-तीन फिट पानी भरा हुआ है। इसके अलावा नदी ने रमनगरा बुझिया क्षेत्र में शेष बची 25 एकड़ कृषि भूमि का कटान धीमी गति से जारी रखा है। वनरक्षक ओमप्रकाश ने बताया कि वनकर्मियों की टीम के साथ रोजाना जंगल क्षेत्र पर निगाह रखी जा रही है। ताकि बाढ़ से गिरने पेड़ों का कोई अवैध कटान न कर सके। लेखपाल पूरन सिंह ने बताया कि कटान की सर्वे रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है।
एक्सईएन ने किया दौरान
शारदा नदी ने नगरियाखुर्द कलां में स्पर संख्या 9ए व 9बी को लगातार अपने निशाने पर लिए हुए है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता मिन्हाज अहमद ने शनिवार को क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अभियंता श्याम सिंह बघेल को मार्जनल बांध व पुराने स्परों को सुरक्षित बचाने के लिए उसके आसपास जिओ बैग लगाने के निर्देश दिए।
बाढ़ पीड़ितों ने की कर्ज माफी की मांग
रमनगरा बुझिया के ग्रामीणों ने विधायक पीतमराम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कृषि भूमि पर फसल उत्पादन को लेकर साधन सहकारी बैंक व पंजाब एंड सिंध बैंक से लिए गए कर्ज को माफ कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा कि तमाम किसानों ने तो निजी लोगों से भी कर्ज लेकर फसलें उगाई थीं जो बाढ़ की भेंट चढ़ गई। ज्ञापन में भवानी राय, अशोक राय, विमल मिस्त्री, संजीव, सुरेश, ज्ञानेंद्र आदि के हस्ताक्षर थे।