डैम के किनारे बने पक्मके कान।
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प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराने वाले शारदा डैम की हालत अब दिनोंदिन खस्ता होती जा रही है। अब डैम की बॉडी के नजदीक बहने वाली लांग ड्रेन के किनारे ही पक्के भवन निर्माण शुरू कर इसके अस्तित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उधर, डैम के जीर्णोद्धार को भेजा गया प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बावजूद बजट रिलीज नहीं किया जा सका है।
शारदा डैम की मुख्यबाडी के बाहरी तल से सिंचाई विभाग का वैसे तो छह सौ फिट की चौड़ाई का क्षेत्र वर्जित क्षेत्र कहलाता है। जहां कोई पक्का निर्माण कार्य अभियंताओं की बिना तकनीकी राय लिए बिना नहीं कराया जा सकता, लेकिन यहां अभियंताओं की लापरवाही के चलते मुख्य बाडी के किनारे बहने वाली सीपेज लांग ड्रेन के किनारे ही अवैध रुप से पक्के मकान बनाने शुरू कर दिए गए हैं। यहीं नहीं मकानों के अंदर खुदाई कर पक्के टैंक बनाए जा रहे हैं। हालांकि पहले लोग शारदा डैम के किनारे झोपड़ियां डालकर रहते थे, लेकिन एक तत्कालीन अभियंता के दौर से पक्के भवन का सिलसिला शुरू हुआ, जो अब तेजी से बढ़ चुका है। हालांकि एक समाजसेवी ने अवैध निर्माण संबंधी सूचना आरटीआई के तहत उनसे मांगी थी, लेकिन उन्होंने यह सूचना नहीं दी।
उधर, डैम के भीतरी हिस्से की हालत दिनों दिन काफी जर्जर होती जा रही है। मुख्यबाडी की पिचिंग भी पूरी तरह से टूटफूट चुकी है। डैम के जीर्णोद्धार को करीब छह करोड़ की लागत का प्रोजेक्ट तो शासन द्वारा स्वीकृत कर लिया गया, लेकिन बजट रिलीज न होने के चलते अभी तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराए जा रहे हैं।
डैम के बाहर लांग ड्रेन के किनारे चार किमी के आसपास कुछ लोगों द्वारा पक्का निर्माण कराने की सूचना मिली है। सींचपालों को ऐसे लोगों की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं। सूची आते ही उनके खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
- वीरेंद्र सिंह यादव, जेई शारदा सागर खंड