शारदा डैम में हो रहा प्रवासी पक्षियों का शिकार
ठंड की दस्तक के साथ ही तराई क्षेत्र के शारदा सागर डैम में प्रवासी पक्षियों का शिकार तेजी से शुरू हो गया है। डैम की तलहटी में बसी कालोनियों में यह मांस ऊंचे दामों में चोरी छिपे बेचा जा रहा है। हालांकि वन महकमा प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर दावा कर रहा है। उत्तराखंड बनने के बाद जीरो किमी से 17 किमी का क्षेत्र यूपी व 17 से 22 किमी का क्षेत्र उत्तराखंड में चला गया था। इधर दोनों प्रांतों के बीच जल बंटवारा नहीं है। ऐसे में इनकी सुरक्षा से जुड़े प्रकरण में जब सेंध लगती है तो विभाग अपना पल्ला झाड़ लेता है। वहीं शिकारी भी इसका फायदा उठाकर प्रवासी पक्षियों को नेपाल तक ले जाकर इनकी बिक्री कर रहे हैं।
शिकारी आजमा रहे हैं नए-नए फंडे
प्रवासी पक्षियों के शिकार को लेकर शिकारी भी नए नए फंडे अजमा रहे हैं। बताते हैं कि चारे में कीटनाशक दवाओं को मिलाकर डैम क्षेत्र में रख दिया जाता है। प्रवासी पक्षी इसको चारा समझकर खाते हैं। कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो जाती है। कुछ बेसुध हो जाते हैं तो शिकारी उन्हें मौका देखकर उठा ले जाते हैं। कुछ कॉलोनियों में प्रवासी पक्षियों के मांस के शौकीनों को पका पकाया मांस भी परोसा जाता है।
प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा हवा हवाई
भले ही वन महकमा इस बात का दावा कर रहा हो कि दोनों प्रांतों के वनकर्मी चौकसी कर रहे हैं, लेकिन यह दावा हवा हवाई है। सच्चाई यह है कि डैम के बाहरी हिस्से में यदि कोई मुखबिरी हो जाती है तो यदाकदा शिकारियों को पकड़कर कार्रवाई का ग्राफ बढ़ा लिया जाता है। यही वजह है कि डैम में हर साल इन प्रवासी पक्षियों की संख्या घटती जा रही है।
शारदा डैम में प्रवास करने वाले पक्षियों की सुरक्षा को लेकर वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि अभी शिकार से जुड़ा कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। यदि कहीं कोई जानकारी मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अनिल शाह, रेंजर, बराही रेंज