शहाबुद्दीन का बयान नफरत फैलाने वाला: मौलाना जरताब
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आस्तान-ए-हशमतिया के सज्जादानशीन मौलाना जरताब रजा ने दरगाह आला हजरत से जुड़े एवं ऑल इंडिया जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के बुधवार को बरेली में दिए गए उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की जिसमें उन्होंने छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे पर नमाज अदा करने की बात कही है।
दरगाह-ए-आस्ताने हशमतिया में आयोजित पत्रकार वार्ता में मौलाना जरताब रजा ने कहा कि मौलाना शहाबुद्दीन का यह बयान लोगों में नफरत फैलाने वाला और अमन चैन में खलल डालने वाला है। इस्लाम में नमाज पढ़ना फर्ज है न कि अयोध्या जाकर पढ़ना। उन्होंने मौलाना शहाबुद्दीन से सवाल किया कि वह पहले लोगों को यह बताएं कि दरगाह आला हजरत के बगल में मौजूद रजा मस्जिद में वह कितने वक्त नमाज अदा करने जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश आर्थिक मंदी और नोटबंदी के कारण मुसीबत के दौर से गुजर रहा है। इस बीच कुछ फिरकापरस्त ताकतें देश में कायम अमनचैन को छिन्न-भिन्न करने की भी फिराक में हैं। ऐसी स्थिति में मौलाना शहाबुद्दीन का यह बयान हिंदू-मुस्लिम भावना को भड़का सकता है। उन्होंने कहा कि मौलाना शहाबुद्दीन ऐसा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए कह रहे हैं। जेहनी तौर पर वह सियासी हैं। विभिन्न पार्टियों से वह टिकट भी मांग चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर शहाबुद्दीन को राजनीतिक लाभ लेना है तो वह सक्रिय रूप से सियासत करने लगें। धर्म की आड़ में सियासत न करें। उन्होंने आवाम से गुजारिश की कि वह लोग मौलाना शहाबुद्दीन के बयान के बहकावे में न आकर छह दिसंबर को अपने-अपने घर के करीब की मस्जिद में नमाज पढ़े। उन्होंने सवाल किया कि कहीं मौलाना शहाबुद्दीन बीजेपी से साठगांठ के चलते तो ऐसा नहीं कह रहे? उन्होंने हिंदू संगठनों से भी अपील की कि वह लोग भी ऐसा कोई कार्य न करें जिससे मुस्लिम भावना भड़के।