जिले में तेज बुखार से होने वाली मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार शाम
एक सात वर्षीय बालिका की बुखार से मौत हो गई। बच्ची के परिवार वालों के
मुताबिक उसकी मौत दिमागी बुखार से होना बताई जा रही है।
जिले में जहां
स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिमागी बुखार से बचाव को जेई टीकाकरण अभियान चलाया
जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बुखार से मौत होने का सिलसिला जारी है।
माधोटांडा रोड के पास स्थित गांव गुर्ज गौटिया निवासी झांझन लाल की आठ
वर्षीय पुत्री कामिनी प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन की छात्रा थी।
विद्यालय
में 17 अगस्त को जेई टीकाकरण के दौरान उसे इंजेक्शन लगाया गया। बकौल झांझन
लाल कामिनी को 20 अगस्त को बुखार आया, तो एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया।
हालत में सुधार न होने पर उसे एक अन्य प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन
उसकी हालत बिगड़ती चली गई। 25 अगस्त को उसकी हालत अधिक खराब होने पर शहर
के एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया।
वहां उन्होंने कामिनी की हालत
अधिक खराब होना बताकर इलाज करने से इंकार कर दिया। फिर शहर के एक अन्य
डॉक्टर के यहां ले गए। जहां डॉक्टर ने कामिनी का सीटी स्कैन करवाने को कहा।
उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम सीटी स्कैन तो हो गया, लेकिन कुछ देर बाद
ही कामिनी ने दम तोड़ दिया। परिवार के अनुसार डॉक्टरों ने कामिनी को दिमागी
बुखार होने की बात कही।
पांच मौतें, फिर भी महकमा मौन
तेज
बुखार से जिले में अब तक पांच लोग बुखार से दम तोड़ चुके हैं, लेकिन
स्वास्थ्य विभाग इन सभी मौतों को दिमागी बुखार से नकराने में लगा है। अब तक
पूरनपुर के गांव गुलड़िया भूपसिंह निवासी दिवांगी, माधोटांडा निवासी शराफत
खां, गांव चांट फिरोजपुर निवासी जयराखन, परेवा निवासी जहीर की बुखार से
मौत हो गई है। इनके परिवार वालों के मुताबिक मौत दिमागी बुखार से हुआ है।
मंगलवार शाम गुर्जगौटिया निवासी आठ वर्षीय बालिका कामिनी की भी बुखार से
मौत हो गई।
मौत का कारण स्पष्ट नहीं
बच्ची की मौत की सूचना
पर डॉ. प्रशांत को गांव भेजा गया था। जांच में पाया गया कि टीकाकरण के दो
तीन बाद उसको बुखार आया। आशा और एएनएम से भी जानकारी जुटाई गई है। बच्ची को
बुखार आने की भी सूचना नहीं दी गई। उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका
है।
- डा. श्रीओम चौहान, सीएमओ