यात्रियों से किराए के नाम पर चालक, कंडक्टर द्वारा लूटपाट के बाद अब पुलिस महकमा नींद से जागा है। टूरिस्ट परमिट बनवाकर सवारियां ढोने वाली बसों पर भी सख्ती की शुरुआत कर दी गई है। सुनगढ़ी पुलिस ने चेकिंग कर एक बस को सीज कर दिया। वहीं, थानावार ऐसे वाहनों की सूची तैयार की जा रही है।
बिलसंडा पुलिस ने मंगलवार को दिल्ली से पलिया जा रही एक बस में लूट की सूचना मिलने पर रोका था। आरोप था कि निजी बस के चालक, परिचालक ने साथियों की मदद से दो नेपाली यात्री समेत 24 सवारियों से नगदी लूटी थी। हालांकि, जांच के बाद पुलिस ने मामला अधिक किराया वसूलने का पाने पर केस दर्ज कर कार्रवाई की थी। इधर, कागजात चेक करने पर पता लगा था कि बस का टूरिस्ट परमिट था। इसके बावजूद नियमों को धता बताकर सवारियां लंबे रूट पर ढो रहे थे। अमर उजाला ने परमिट के नाम पर खेले जा रहे इस खेल को 20 जुलाई के अंक में टूरिस्ट परमिट के नाम पर धड़ल्ले से सवारियां ढो रहीं निजी बसें शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसको पुलिस अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। बुधवार को थानावार चेकिंग कराई गई। जिसमें सुनगढ़ी पुलिस ने खाता खोलकर शुरुआत कर दी है। असम चौराहे से जयपुर तक की सवारियां ढोने वाली बस को इंस्पेक्टर अतुल प्रधान ने रोक लिया। चालक से कागजात दिखाने को कहा। जिस पर न तो चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस निकला, न ही बस से जुड़ा कोई कागजात। जिस पर सख्ती करते हुए बस को सीज कर दिया गया है। इसके अलावा अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र से चलने वाले ऐसे डग्गामार वाहनों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। सूची बनने के बाद एआरटीओ को भेजी जाएगी। इस दौरान सुनगढ़ी पुलिस ने अन्य वाहनों की भी चेकिंग की, जिसमें दो दर्जन चालान किए गए है। इंस्पेक्टर अतुल प्रधान ने बताया कि कागजात न मिलने पर निजी बस को सीज किया है। एक सूची बनाकर एआरटीओ को भेजी जा रही है।
‘खराब रास्ता और चेकिंग के डर में घुमा दी थी बस’
- पकड़े गए निजी बस के चालक-कंडक्टर ने पूछताछ में बताया
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। यात्रियों से लूटपाट के आरोप में पकड़े गए निजी बस के कर्मचारियों ने सिर्फ अधिक रुपये वसूलने की बात कबूल की है। इसके अलावा बस को बीसलपुर की ओर लाने के पीछे खराब रास्ते और चेकिंग को कारण बताया है। फिलहाल दोनों कोई सटीक जवाब पुलिस को नहीं दे सके है।
पूरनपुर के टांडा टांडा छत्रपति गांव के निवासी अशोक की तहरीर पर केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने निजी बस के चालक लखीमपुर जिले के गोला क्षेत्र के ताजपुर गांव निवासी बलजीत सिंह, परिचालक निघासन के निवासी तेजेंद्र सिंह से पूछताछ शुरू कर दी। इन लोगों ने लूटपाट में शामिल दस साथियों को भुता में उतारने की बात को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि कोई उनके साथ नहीं था। लूटपाट नहीं सिर्फ सवारियों को धमकाकर अधिक रुपये वसूले थे। इसके अलावा बरेली से पीलीभीत के रास्ते पलिया जाने के बजाए बीसलपुर की ओर गाड़ी लाने के पीछे एआरटीओ के चेकिंग करने और खराब सड़क को कारण बताया है। पुलिस के यह कहने पर कि रूट बदलने के बारे में सवारी को क्यों नहीं बताया गया। इसका जवाब आरोपी नहीं दे सके है। एसओ जितेंद्र यादव ने बताया कि दोनों आरोपियों को केस दर्जकर चालान कर दिया गया है। आरोपियों से किराए के अधिक रुपये वसूलने की बात कबूल की है। हालांकि, पूछताछ में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।