स्थानांतरण होने से नाराज गन्ना समिति के सामायिक लिपिक खुद पर पेट्रोल डालकर कमरे में बंद लिया और स्थानांतरण निरस्त न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी। सूचना पर पहुंचे अधिकारी कमरे में बंद लिपिक के हाथ में माचिस देखकर घबरा गए। उसने मनाने की कोशिश नामकाम होने पर स्थानांतरण निरस्त कर आदेश उसे दिया गया। जिससे करीब चार घंटे बाद लिपिक कमरे से बाहर आया।
सहकारी गन्ना समिति में तैनात सीजनल लिपिक अजीत सिंह का स्थानांतरण पिछले दिनों मझोला समिति कर दिया गया। इससे नाराज अजीत सिंह सोमवार को समिति पहुंचा और यहां दोपहर के समय उसने खुद पर पेट्रोल डालकर कमरे में बंद कर लिया और हाथ में माचिस लेकर आत्मदाह की चेतावनी देने लगा। सचिव सौवीर सिंह एससीडीआई के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों ने लिपिक को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह स्थानांतरण निरस्त कराने की जिद पर अड़ा रहा। सूचना मिलने पर कुछ देर बाद नगर चौकी इंचार्ज आरके पांडेय भी समिति पहुंचे और उन्होंने भी समझाने का प्रयास किया। किसी भी तरह उसके राजी न होने पर समिति अधिकारियों ने जिला गन्ना अधिकारी से बात की। जिस पर डीसीओ ने स्थानांतरण निरस्त का आदेश जारी किया। आदेश की प्रति मिलने पर करीब चार घंटे बाद लिपिक कमरा खोलकर बाहर आया। अजीत के बाहर निकलने पर सभी ने राहत का सांस ली। लिपिक अजीत सिंह ने बताया कि नवंबर माह में सीजन शुरू होने पर उसे काफी मुश्किल से 10 हजार रुपये सुविधा शुल्क लेने के बाद ज्वाइन कराया गया। उसने सुविधा शुल्क लिए जाने की शिकायत की, जिससे नाराज होकर अधिकारियों ने उसका स्थानांतरण पूरनपुर से मझोला समिति कर दिया।
नहीं मानी परिवार वालों की भी मनुहार
अजीत द्वारा पेट्रोल डालकर खुद को कमरे में बंद कर लेने की सूचना पर मां मुन्नी देवी, पत्नी रीतू सिंह व पुत्री सुरभि भी समिति पहुंची। तीनों उसे कमरे में देख रो पड़ी और तीनों ने अजीत को मनाने का प्रयास किया लेकिन वह स्थानांतरण निरस्त होने से पहले किसी भी कीमत पर बाहर आने को राजी नहीं हुआ।
अजीत सिंह का स्थानांतरण 21 दिसंबर को डीसीओ कार्यालय मझोला समिति किया गया था। जिस पर वह ज्वाइन करने मझोला भी गया था लेकिन कुछ कर्मचारियों ने उसे भड़का दिया। उसके द्वारा की गई सुविधा शुल्क की शिकायत की जांच में आरोप निराधार निकले हैं। आज जो भी हुआ वह प्री प्लान ड्रामा था।
सौवीर सिंह, सचिव