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..ऐसे तो सुधर चुकी शैक्षिक गुणवत्ता

Sat, 24 Jan 2015 12:38 AM IST
पीलीभीत।
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 ‘देश भर में 26 जनवरी को क्या होता है?’ जवाब था महात्मा गांधी का जन्मदिन। सुनने व पढ़ने के दौरान यह अजीब लग रहा हो, लेकिन यह जवाब जिले के उन सरकारी विद्यालयों के बच्चों का था, जिन पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहाती है। तमाम प्रयासों के बाद भी परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता का ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा है। यह हाल तब है जब शासन द्वारा गुणवत्ता सुधार को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं।

गणित तो दूर हिंदी में गिर रहा है पढ़ाई का स्तर
जिले में 1230 प्राथमिक विद्यालय व 570 उच्च प्राथमिक विद्यालय में वर्तमान में करीब 3200 शिक्षक तैनात है। इन शिक्षकों पर हर साल मोटा बजट भी खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में गणित व अंग्रेजी तो दूर हिंदी में भी पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
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आधे से अधिक स्कूलों में गुणवत्ता मिली खराब
शैक्षिक गुणवत्ता को परखने के लिए बीएसए ने पिछले पखवाड़ा भर के भीतर करीब 50 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बीएसए को आधे से अधिक विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता की स्थिति बेहद खराब मिली। बीएसए के मुताबिक जिन विद्यालयों में गुणवत्ता खराब पाई गई है, उनके हेडमास्टरों को नोटिस जारी भी किए गए।
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दोबारा जांची जाएगी शैक्षिक गुणवत्ता
परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता की पूरी जानकारी है। स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार को खंड शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान जहां गुणवत्ता खराब पाई गई थी, उन विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता दोबारा जांची जाएगी। सुधार न मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अंबरीष कुमार यादव, बीएसए

फैक्ट फाइल:
- 1800 परिषदीय स्कूल हैं जिले में
-  2.82 लाख बच्चे हैं अध्ययनरत
- 3205 शिक्षक तैनात हैं विद्यालयों में
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