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Pilibhit News: घोटालेबाजों की मौज... विकास कार्य अधर में

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शिकायत पर लापरवाही उजागर होने पर डीएम ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश, जीरों टॉलरेंस नीति पर सवाल
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पीलीभीत। ग्राम पंचायत स्तर तक योजनाओं का लाभ पहुंचने और विकास कार्य के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपये बजट खर्च किए जा रहे हैं। जीरो टॉलरेंस नीति पर अमल करने पर जोर भी दिया जा रहा है, लेकिन पंचायती राज विभाग के जिम्मेदार शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। विकास समेत कई योजनाओं पर अनियमितताओं के आरोप लगाने पर डीएम ने जांच बैठाई। आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए, लेकिन आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने से जिम्मेदार मौज काट रहे हैं। इससे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पिछले तीन माह में विकास भवन से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें पंचायत सचिव पर अपात्र को पात्र, तो कहीं पात्र को अपात्र दर्शा दिया गया। इतना ही नहीं पंचायती राज कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों ने नियम विरुद्ध तरह से लाखों रुपये के भुगतान करा दिए। शिकायत के बाद भी अफसर संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं कर सके। इस कारण कई विकास कार्य अधर में अटक गए हैं। संवाद
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केस एक

वार रूम के कर्मचारियों ने कर दिया लाखों रुपये का खेल
पंचायती राज कार्यालय में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत तीन कर्मचारियों को तैनात किया गया है। कर्मचारियों ने नियम विरुद्ध तरह से लाखों रुपये का भुगतान कार्यालय में बैठकर कर दिया। आरोप है कि उन्होंने कई फर्मों के माध्यम से अपने निजी लोगों के खातों में भुगतान किया है। शिकायत के बाद डीएम ने जांच के आदेश दिए, करीब दो माह बीत जाने के बाद भी संबंधित तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी।


केस दो

प्रधान (प्रशासक) पर डीएम ने तो कर दी कार्रवाई, सचिव को दिया गया अभयदान
ग्राम पंचायत में होने वाले विकास कार्य पंचायत सचिव और प्रधान की सहमति के साथ ही कराए जा सकते हैं। ऐसे में मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत हर्रईया उर्फ हरकिशनपुर में डीएम की ओर से प्रधान (प्रशासक) के वित्तीय अधिकार को सीज कर दिया, लेकिन सचिव पर विभागीय अफसर अब तक कार्रवाई नहीं कर सके हैं।
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केस तीन

लापरवाही में कन्या का नहीं हो सका विवाह, भटक रही पीड़िता
पूरनपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव दौलतपुर की रहने वाली नैंसी ने सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत आवेदन किया। वह कन्या सामूहिक योजना के अंतर्गत पात्र श्रेणी में थी। आरोप है कि सुविधा शुल्क न दिए जाने के कारण सिस्टम की बेरुखी से उसे अपात्र दर्शा दिया गया। इससे उसका विवाह नहीं हो सका। वहीं, पीड़िता अब न्याय के लिए अफसरों के चक्कर काट रही है। इसके बाद भी सचिव को अभयदान दिया गया।


केस चार

व्यक्तिगत शौचालय के लिए 25 अपात्रों को दिया योजना का लाभ
अमरिया ब्लॉक के गांव उदयपुर माफी में व्यक्तिगत शौचालय के लिए सर्वे कराया गया। इस सर्वे को पंचायत सचिव की ओर से किया गया। सर्वे के दौरान पंचायत सचिव ने करीब 25 अपात्रों को पात्र दर्शा दिया। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने मामले की शिकायत की। जांच में मामला सही पाया गया। इसके बाद अफसरों ने निर्माण कार्य तो रुकवाया दिया, लेकिन संबंधित सचिव पर कार्रवाई की आंच नहीं आ सकी।
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कुछ मामलों में जांच चल रही है। जिन मामलों में विभाग की ओर से अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसको लेकर जानकारी की जाएगी। सभी विभागों में नियमानुसार कार्य कराए जाने के लिए निर्देश भी दिए गए है। - सतीश प्रसाद मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी।
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