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मृतक आश्रित नौकरी देने में भी खेल, नियम पालन करना ही भूले जिम्मेदार

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पीलीभीत। जिला पंचायती राज विभाग में विकास के नाम पर घोटाला करने के तमाम मामले पहले ही सुर्खियां बने हुए हैं। अब मृतक आश्रित में बिना नियम कायदे पालन करते हुए सीधे नौकरी दिए जाने का नया मामला सामने आया है। हालांकि जिसे नौकरी दी गई वह पात्र है। इस मामले में गड़बड़ी सिर्फ यह है कि नौकरी की पत्रावली का अनुमोदन वरिष्ठ अधिकारियों से नहीं कराया गया है। प्रभारी डीपीआरओ की इस मामले में सीधे लापरवाही उजागर हुई है। प्रकरण को जानकर अधिकारी भी दंग रह गए हैं, ऐसे में प्रभारी डीपीआरओ की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।
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बिलसंडा ब्लॉक में तैनात पंचायत सचिव रजत सक्सेना 29 जुलाई की सुबह शहर स्थित आवास से ड्यूटी पर जा रहे थे। रास्ते में उनकी तबीयत खराब हो गई थी। बिलसंडा ब्लॉक में पहुंचकर उन्होंने तबीयत खराब होने की जानकारी अपने स्टाफ को दी। फिर उन्हें प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया था। मगर वहां पर वह भर्ती नहीं हो पाए थे। इसके बाद उन्हें सीएचसी बिलसंडा ले गए थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। सचिव की मौत हार्टअटैक से होना बताई गई थी। इसके बाद मृतक आश्रित के तहत उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जानी थी। उनकी बेटी को पात्र मानते हुए उसे नौकरी दे दी गई। मगर अधिकारियों की लापरवाही की वजह से यह मामला विवादों में घिर गया है।
प्रभारी डीपीआरओ को सीधे भर्ती का नहीं है अधिकार
जनपद में प्रभारी डीपीआरओ के तौर पर प्रमोद कुमार की तैनाती है। नियमानुसार वह सीधे भर्ती नहीं कर सकते। यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। फिर भी उन्होंने इस मामले में पत्रावली तैयार की। किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को अनुमोदन के लिए पत्रावली भी नहीं भेजी। पूरी कार्रवाई खुद ही करते रहे और मृतक आश्रित में पात्र को नौकरी दे डाली। इस मामले में जब बिना पत्रावली सामने आए सीधे भर्ती किए जाने का पता लगा तो विभाग में खलबली मच गई है। नियमों का पालन न करने पर प्रभारी डीपीआरओ भी घिर गए हैं। अधिकारी भी इसे बड़ी चूक मान पड़ताल में जुट गए हैं।
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इस तरह की जानी चाहिए थी मृतक आश्रित की भर्ती
प्रभारी डीपीआरओ को अपने स्तर से भर्ती करने का कोई अधिकार नहीं। नियमानुसार एक पत्रावली तैयार करने के बाद सीडीओ और फिर डीएम के पास अनुमोदन के लिए भेजी जानी चाहिए थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए प्रक्रिया के तहत भर्ती होनी चाहिए थी। मगर ऐसा कुछ नहीं किया गया। अधिकारियों को भी भर्ती के बाद इसकी जानकारी हुई। किसी भी वरिष्ठ अफसर को पत्रावली नहीं भेजी गई थी। यह बात खुद अधिकारियों ने स्वीकार भी की। नियम पालन में बरती गई चूक से मामला बेवजह विवादास्पद हो गया है।
डीएम तक पहुंचा मामला
मृतक आश्रित में वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमोदन लिए बिना भर्ती का मामला पकड़ में आने पर खलबली मच गई है। मामला डीएम पुलकित खरे तक पहुंच गया है। सीडीओ ने डीएम को पूरे प्रकरण से अवगत भी करा दिया है। इसे लेकर मंथन भी चलता रहा। जानकारों के मुताबिक अब तक मामले में प्रभारी डीपीआरओ की ही लापरवाही सामने आ रही है।
बिलसंडा ब्लॉक में तैनात एक सचिव की कुछ माह पूर्व मौत हो गई थी। अब उसकी बेटी को मृतक आश्रित में नौकरी दी गई है। पात्र के चयन में कोई गड़बड़ी नहीं है। केवल नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। मामले को लेकर डीएम सेे बात की गई है। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
प्रभारी डीपीआरओ से मांगा है जवाब
सीडीओ के माध्यम से मामले की जानकारी मिली थी। प्रकरण गंभीर है। प्रभारी डीपीआरओ से जवाब तलब किया गया है। उनका पक्ष सुनने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। मामले में सख्त कार्रवाई कराएंगे। - पुलकित खरे, डीएम
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