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घोटाले की जांच में भी घोटाला.. ग्रामीणों के विरोध पर लौटी टीम

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पीलीभीत। ग्राम पंचायत कुसुमा में विभिन्न मदों में कराए गए कामों की जांच में एक माह के भीतर दूसरी बार लापरवाही देखने को मिली। घोटालों की जांच को लेकर डीएम के सख्त रुख अपनाने के बाद अफसर जांच में जुट तो गए हैं मगर उसमें भी घपलेबाजी की शिकायतें सामने आ रही हैं। रविवार को जांच के नाम पर औपचारिकता निभाने के लिए टीम जब बिना अभिलेख लिए गांव गई तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। मजबूरन जांच टीम को वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से फिर शिकायत की है।
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दियोरियाकलां कोतवाली क्षेत्र के गांव बड़ेपुरा कुसमा के कुछ ग्रामीणों ने बीते दिनों डीएम को शिकायत कर बताया था कि उनकी ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और रोजगार सेवक ने विकास कार्यों के नाम पर बड़ा घोटाला किया है। मनरेगा मजदूरों के बजाय करीबियों के खाते में रुपये भेजकर निकाले गए। जांच में लगाए गए बीडीओ बरखेड़ा को शिकायत के बाद हटाकर जांच मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को दे दी गयी। 20 सितंबर को सीवीओ अपनी टीम के साथ गांव में जांच करने गए तो ग्रामीणों ने घोटालेबाजों से मिलने के आरोप लगाकर वहां हंगामा कर दिया। उस वक़्त अफसर कागज लेकर कार्यालय आने की बात कहकर चले गए थे। रविवार को टीम फिर बिना अभिलेख लिए जांच करने पहुंच गई और जांच के नाम पर औपचारिकता निभाने लगी। ग्रामीणों ने इस तरह से जांच करने का विरोध किया। उसके चलते जांच टीम को बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने जांच टीम पर घोटालेबाजों को बचाने का आरोप लगाते हुए डीएम से दोबारा शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच टीम में शामिल दो सदस्य घोटालेबाजों को संरक्षण दे रहे है। हर बार टीम बिना अभिलेख लिए गांव आकर जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाती है। डीएम ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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