प्रधानी के आरक्षण की शनिवार को जारी हुई अनंतिम सूची में भी गड़बड़ी की शिकायतें आने लगी हैं। एससी बाहुल्य गांव में अनारक्षित एवं अनारक्षित महिला सीट रखी गई है, वहीं जिन गांव में एससी की एक भी नागरिक नहीं है वहां एससी का आरक्षण किया गया है।
ग्राम पंचायत की आरक्षण अनंतिम सूची में भी जिला पंचायत के आरक्षण की अनंतिम सूची की तरह अनुसूचित जाति के पदों पर सर्वाधिक शिकायतें आ रही है। ग्राम प्रधान पद के लिए जारी हुई सूची में पूरनपुर ब्लाक के बार्डर क्षेत्र के गांव नगरिया खुर्द कलां और बंदरबोझ के ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों गांव अनुसूचित जाति बाहुल्य हैैं। इनमें थारू जाति की जनसंख्या सर्वाधिक हैं लेकिन दोनों गांव का आरक्षण इससे एकदम उलट है। इसमें नगरिया खुर्द कलां में प्रधान की सीट अनारक्षित महिला और बंदरबोझ में अनारक्षित रखी गई है। दोनों गांव की प्रधान क्रमश: रुकमणी देवी और इंद्रावती ने इसकी शिकायत डीएम को भेजी है। वहीं मरौरी ब्लाक के कंजा हरैया व भूड़ा सरैदा के ग्रामीणों का आरोप है दोनों गांव बंगाली बाहुल्य हैं जो पिछड़ा वर्ग में आते हैं। दोनों गांव में अनुसूचित जाति का एक भी नागरिक नहीं है। इसके बावजूद दोनों गांव में प्रधान पद अनारक्षित कर दिया गया है। इस बावत जानकारी करने पर डीपीआरओ वीपी सक्सेना ने बताया कि आरक्षण का निर्धारण इंटरनेट पर लोड वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है। जनगणना सूची में गांव कंजा हरैया और भूड़ा सरैदा में अनुसूचित जाति की संख्या दर्शायी गई है। आपत्तियां ली जा रही हैं यदि कहीं कोई गड़बड़ी होगी तो उसे दूर किया जाएगा।