फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोडवेज का सफर मतलब जान आफत में

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। राज्य सड़क परिवहन निगम भले ही यात्रियों के सुरक्षित और सुहाने सफर का वादा करता हो, लेकिन स्थानीय डिपो की 50 फीसदी बसों में सफर करने का मतलब अपनी जान खतरे में डालना है। तमाम रोडवेज बसों की खिड़कियां टूट चुकी हैं। सीटें जर्जर हैं। बसों के अंदर झूलते तारों का मकड़जाल कभी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। खटारा बसों में अगर यात्री बैठकर सफर करते हैं तो सड़कों के गड्ढे इनकी हालत बिगाड़कर रख देते हैं। सब कुछ सामने होने के बावजूद अफसर व्यवस्था सुधारने के बजाए सब कुछ ठीक होने का दावा कर मामलों को छुपाने का प्रयास करते हैं। पीलीभीत रोडवेज बस की हालत की लाइव रिपोर्ट-
विज्ञापन

डिपो पर संचालित की जा रही 50 फीसदी बसों में तार झूल रहे है। चालक के सीट के नीचे तो तार मकड़जाल की तरह दिखाई देते है। वहीं आपातकालीन स्थिति में आग बुझाने के लिए नाम मात्र बसों में सिलिंडर की व्यवस्था की गई है। खास बात यह है कि जिन चालकों और परिचालकों के भरोसे बसें चलाई जा रही है उनको आग बुझाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है।
डिपो पर संचालित बसों के दुरूस्त होने को लेकर भले ही अफसर दावे करते हो, लेकिन पीलीभीत डिपो की बसों की हालत काफी जर्जर है। अधिकांश बसों की बॉडी जर्जर है। इसके अलावा खिड़कियां भी टूट चुकी है। वहीं बैठने की बात करें तो अधिकतर बसों में सीटें फट चुकी हैं और कई में सीटें ही गायब दिखाई दे रही है।
विज्ञापन

रोडवेज डिपो पर यात्री की सुविधा की बात करे तो यहां बैठने के लिए मात्र तीन बेंच लगाई गई है। वहीं इन दिनों शौचालय के निकट लगा इंडियन मार्का हैंड पंप एक साल से खराब पड़ा है। मात्र चंद टंकी के सहारे पानी की पूर्ति की जा रही है।
डिपो पर एक मात्र पूछताछ केन्द्र है। यहां की व्यवस्थाएं बदहाल है। दुकान नुमा कक्ष में ही बैठकर टाइम कीपर अपने कार्यों को पूरा करते हैं। पूछताछ केन्द्र में दीवारों पर हर तरफ गंदगी और जाला दिखाई दे रहा है। वहीं पूछताछ केंद्र पे दो स्पीकर लगे है। बड़े स्पीकर की बात करे तो रख रखाव के अभाव में स्पीकर भी खराब हालत में पहुंच चुका है।
डिपो परिसर में गंदगी हावी है। शौचालय की ओर पुराने टीन शेड व अन्य गंदगी के ढेर लगे है। इसके चलते मच्छरों का भी प्रकोप अधिक है। ऐसे में अगर यात्री लगातार दस मिनट तक रूक जाए तो उसका बीमार होना संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें