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बार-बार पैचवर्क, फिर गड्ढों से भरी 32 करोड़ की सड़क

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माधोटांडा पीलीभीत मार्ग पर गड्ढों को भरने के लिए डाले गए पत्थर। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। जिले की अधिकतर सड़कें लंबे समय से खस्ताहाल थीं, पर अब कुछ दिन पहले हुई बारिश से स्थिति और खराब हो गई है। सड़कों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। 32 करोड़ से बनी पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग पर भी गड्ढों की भरमार है। क्षेत्र के लोगों के कई बार शिकायत करने के बाद अब पीडब्ल्यूडी ने गड्ढों का भरना शुरू किया है। दो दिन पहले ही पैचवर्क का काम शुरू हुआ है लेेकिन वह भी आधा-अधूरा।
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माधोटांडा पीलीभीत मार्ग से करीब बीस से अधिक गांव जुड़े हैं। तीस किलोमीटर लंबे मार्ग पर दस किलोमीटर का जंगल क्षेत्र भी पड़ता है। वर्ष 2015 में मार्ग को नया रूप देने के लिए 32 करोड़ की लागत से चौड़ा किया गया। कार्यदायी संस्था की ओर से कार्यों में लापरवाही बरती गई। नतीजतन निर्माण के तीन साल बाद ही मार्ग उधड़ने लगा। लोगों के आक्रोश के बाद विभागीय अफसर सख्त हुए तो कार्यदायी संस्था ने लापरवाही को छिपाने के लिए गड्ढे भरवा दिए।
बाद में भारी वाहनों की आवाजाही के चलते मार्ग पर फिर गड्ढे हो गए। कई स्थानों पर मार्ग उखड़ने लगा। इसी क्रम में अब एक बार फिर सड़क को ठीक करने की कवायद की जा रही है। पीलीभीत की तरफ से गड्ढों को भरा जा रहा है। लोगों का आरोप है इस बार मरम्मत के नाम पर गड्ढों पर पत्थर डालकर छोड़ दिया जा रहा है। वाहनों के निकलने से पत्थर गड्ढों से बाहर निकल रहे हैं। कार्य की निगरानी न होने से मजदूर जल्दबाजी में गड्ढों को भरकर औपचारिकता निभा रहे हैं।
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कई स्थानों पर मार्ग की चौड़ाई कम होने से हो रहे हादसे
मार्ग को चौड़ा करने के समय मानक को दरकिनार किया गया। कई स्थानों पर मार्ग की चौड़ाई कम कर दी गई। मार्ग की जर्जर स्थिति होने के कारण चौड़ाई का आकलन न कर पाने से हादसे भी हो रहे हैं। दो दिन पूर्व जमुनिया के पास दो वाहनों की आमने-सामने टक्कर भी हो गई थी।
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टोल से बचने के लिए भी किया जाता है इस मार्ग का इस्तेमाल
पूर्व में असम हाईवे पर गजरौला के निकट टोल प्लाजा का संचालन शुरू किया गया। वाहनों से टैक्स वसूली होने लगी। ऐसे में शहर से पूरनपुर और पूरनपुर से जिला मुख्यालय आने वाले लोग टैक्स से बचने के लिए भी इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। इसके अलावा माधोटांडा, कलीनगर, जमुनिया, मत्थना, रानीगंज, कल्याणपुर के अलावा तराई इलाके के दस से अधिक गांव के लोग भी मुख्यालय जाने के लिए इस मार्ग का ही इस्तेमाल करते हैं। जिससे सड़क जल्द खराब हो जाती है। बाद में इसको ठीक करने की दिशा में कदम नहीं उठाया जाता।
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