कोना-कोना अतिक्रमण की गिरफ्त में
शहर के एंट्री प्वाइंटों पर गौर करें तो आसाम चौराहा, माधोटांडा मार्ग पर गौहनिया रेलवे क्रासिंग, टनकपुर मार्ग पर नकटादाना चौराहा से पहले सड़कों के दोनों तरफ अतिक्रमण देखा जा सकता है। सबसे ज्यादा अतिक्रमण शहर के भीतर है। स्टेशन चौराहा से लेकर ड्रमंडगंज चौराहा तक सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ का नामोनिशान ही मिट चुका है। फुटपाथ पर ही दुकानें खुली हैं। करीब आठ फिट चौड़ी सड़क सिकुड़कर अब मात्र तीन-चार फिट ही बची है।
इन मार्गों पर रहता अतिक्रमण
स्टेशन रोड, चूड़ी वाली गली, छिपियान मस्जिद रोड, जेपी रोड, ड्रमंडगंज चौराहा, स्टेशन चौराहा, लोहा बाजार, चौक बाजार, गांधी स्टेडियम रोड, लाल रोड, पंजाबियान, बरेली गेट, छतरी, चौराहा, आसाम चौराहा, गौहनियां चौराहा, नकटादाना चौराहा।
हाईकोर्ट का आदेश भी रहा बेअसर
हाईकोर्ट के आदेश पर करीब ढाई साल पूर्व नगरपालिका ने प्रशासन और पुलिस के सहयोग से अतिक्रमण अभियान चलाया, लेकिन यह अभियान स्टेशन चौराहा से शुरू होकर छतरी चौराहा तक ही चल सका। प्रशासन पर सहयोग न मिलने का आरोप लगाते हुए नगरपालिका ने अभियान को रोक दिया था।
यह था हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक नगरपालिका को प्रशासन और पुलिस के सहयोग से अतिक्रमण हटाना था। अतिक्रमण के दौरान वीडियोग्राफी करने के निर्देश दिए गए थे। अतिक्रमणकारियों का एक रजिस्टर भी बनना था जो संबंधित थाना क्षेत्र में रखा जाना था, ताकि कब्जा होने की दशा में पुलिस उस रजिस्टर के माध्यम से कार्रवाई कर सके, लेकिन थाना सुनगढ़ी व कोतवाली में अभी तक इसका रजिस्टर ही नहीं बन सका है।
आम जनता व व्यापारी आगे आएं
अतिक्रमण प्रशासन और पुलिस के बिना सहयोग से नहीं हटाया जा सकता है। पहले अतिक्रमण अभियान चलाया गया था लेकिन सहयोग न मिलने के कारण उसे बीच में रोकना पड़ा था। इसके लिए आम जनता व व्यापारी वर्ग भी आगे आए तो बेहतर परिणाम दिखाई देंगे।
प्रभात जायसवाल, नगरपालिका अध्यक्ष