इंडो नेपाल सीमा पर बार्डर रोड निर्माण का ठप पड़ा काम पुन: शुरू होगा। शासन ने इसके लिए 4.5 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वहीं वन विभाग ने भी टाइगर रिजर्व की जमीन के लिए एनओसी देने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
नेपाल से सटी भारत सीमा पर बार्डर रोड बनाया जाना है। इसमें जिले में 37 किमी मार्ग बनना है। इसमें 33.85 किमी भाग टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पड़ता है, जबकि शेष मार्ग इसके बाहर हजारा क्षेत्र में हैं। जंगल की जमीन उपलब्ध न होने पर करीब एक साल पूर्व हजारा क्षेत्र में काम शुरू हुआ था लेकिन कुछ दिनों काम चलने के बाद बजट के अभाव में काम बंद हो गया था। वहीं जंगल के अंदर पेड़ों की पैमाइश के बाद भी एनओसी नहीं मिल पा रही थी। करीब एक साल से ठप पड़े काम में अब पुन: तेजी आने के आसार हैं। हजारा क्षेत्र में बंद पड़े काम को शुरू कराने के लिए शासन ने 4.5 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है जो विभाग को प्राप्त हो गई है। धनराशि जारी होने के बाद अधिशासी अभियंता पवन कुमार ने हजारा क्षेत्र में पहुंचकर पूर्व में हुए कार्य का निरीक्षण किया और आगे होने वाले कार्य की स्थिति का आंकलन किया। सहायक अभियंता अजय कुमार ने बताया कि जंगल के बाहर क्षेत्र में पूर्व में अधिग्रहीत जमीन पर सड़क निर्माण के लिए 4.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इससे काम शुरू कराया जाएगा।
वनविभाग ने भी शुरू की एनओसी की तैयारी
शासन स्तर पर बैठक के बाद बार्डर रोड निर्माण में तेजी आई है। शायद यही वजह है कि जो वनविभाग अब तक इंडो नेपाल बार्डर निर्माण विभाग के अभियंताओं से बात करने को तैयार नहीं था वही विभाग अब अभियंताओं को फोन से बुलाकर अभिलेखों का आदान प्रदान करने में जुटा है। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि टाइगर रिजर्व में लगभग 37 किमी मार्ग बनना है। इसके पेड़ों के मूल्यांकन कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन से एनओसी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया होगी।