राइस मिलों द्वारा तैयार किए गए चावल का उतार एफसीआई ने एकाएक बंद दिया है। इससे जिले के सभी गोदामों पर चावल के ट्रक खड़े हो गए हैं। राइस मिलर्स ने बिना किसी सूचना के उतार बंद होने पर नाराजगी जताई है और इसे राइस मिलर्स के साथ सौतेला व्यवहार बताया है।
जिले में सरकारी धान की खरीद के बाद इसका राइस मिलर्स के माध्यम से चावल तैयार कराया जाता है। राइस मिलर्स से तैयार चावल को एफसीआई के गोदामों में उतार होने के बाद ही उनका भुगतान किया जाता है। पिछले काफी समय से उतार होने के बाद भी भुगतान न होने से राइस मिलर्स परेशान थे। वर्तमान में चावल उतार लगभग समाप्त होने को है। प्रतिदिन की तरह बुधवार को भी बिठौरा, रंपुरा और ललौरीखेड़ा के गोदामों पर राइस मिलों के ट्रक चावल लेकर पहुंचे, लेकिन गोदाम प्रभारियों ने अधिकारियों का आदेश बताकर उतार करने से मना कर दिया। इस पर राइस मिलर्स के जिलाध्यक्ष अश्विनी अग्रवाल ने एफसीआई के अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। जिलाध्यक्ष का कहना है कि यदि उतार बंद करना ही था तो एक दिन पहले सूचना दी जानी चाहिए थी। उन्होंने एफसीआई पर व्यापारियों का कभी क्वालिटी के नाम पर, कभी भुगतान और कभी उतार के नाम पर परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि दो चार दिन में सभी चावल का उतार पूरा हो जाता, लेकिन अब उन्हें सरकारी चावल अपने गोदामों में रखना पड़ेगा, जिससे भुगतान भी फंसा रहेगा।
चावल उतार का 60 करोड़ बाकी
जिले मेें हुई खरीद में आढ़तियों और राइस मिलर्स ने किसानों से धान खरीदकर उनका भुगतान तो अपने पास से कर दिया, लेकिन धान से तैयार चावल को सरकारी गोदामों में उतारने के बाद भी एफसीआई ने चावल का भुगतान मिल स्वामियों को नहीं किया। जिले की बात करें तो राइस मिलर्स का करीब 60 करोड़ रुपये एफसीआई पर बकाया है।
बजट न होने के कारण भुगतान की समस्या सभी जगह है। शायद इसी के चलते शासन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चावल का उतार बंद किया गया है। बजट स्वीकृत हो गया है जल्द ही भुगतान और उतार शुरू कराया जाएगा।
- एसके यादव, डिप्टी आरएमओ