टाइगर रिजर्व फारेस्ट में गैंडा परियोजना लागू करने को लेकर शुरू हुआ सर्वे पूरा कर लिया गया है। सर्वे टीम ने इसकी रिपोर्ट प्रभागीय वनाधिकारी को सौंप दी है।
टाइगर रिजर्व बनने के बाद जनपद के जंगल में गैंडा परियोजना लागू करने की जोरदार पहल शुरू की गई थी। उस दौरान प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार हाजी रियाज अहमद व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा ने भी इसमें खासी दिलचस्पी ली थी। इसके बाद प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश ने आला अफसरों के निर्देश पर टाइगर रिजर्व की दो रेंज में से कुछ भाग का चयन कर सर्वे के निर्देश दिए थे। गैंडा परियोजना के लिए महोफ में एक हजार हेक्टेयर व बराही रेंज में लगभग तीन सौ हेक्टयेर क्षेत्र का चयन किया गया था। सर्वे में परियोजना लागू होने से पूर्व सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सर्वे किया गया है। महोफ रेंज के डिप्टी रेंजर मोबीन आरिफ व बराही रेंज के रेंजर अनिल शाह ने बताया कि गैंडों की मॉनीटरिंग आसानी से हो सके, इसको लेकर दो हाथी भी रखे जाएंगे। पूरे परियोजना क्षेत्र को सोलर तार फेसिंग से आच्छादित किया जाएगा। असम से नर व मादा गैंडों को लाया जाएगा। बताया कि सर्वे टीम ने कार्य पूरा कर रिपोर्ट प्रभागीय वनाधिकारी को सौंप दी है। उनके द्वारा इसे अंतिम रूप देकर आला अफसरों को भेजा जाएगा और वहां से शासन को बजट के लिए भेजा जाएगा। यदि जनप्रतिनिधियों की पहले जैसी दिलचस्पी रही तो इस पर मुख्यमंत्री शीघ्र बजट देकर कार्य शुरू करा सकते हैं। बताया कि टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन्यजीवों की संख्या तो काफी बढ़ी है, लेकिन पर्यटकों को भ्रमण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि जनपद के जंगल में गैंडा परियोजना जल्द लागू हो गई तो इससे जिले की तस्वीर बदल जाएगी।