इसे 10 वर्षीय कार्ययोजना में शुमार किया गया है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद पहली बार दुधवा नेशनल पार्क की तरह यहां भी 10 वर्षीय कार्ययोजना बनाने की तैयारी हो रही है।
बता दें कि नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्च्युरी से आने वाले गैंडों के लिए जनपद के जंगल काफी मुफीद हैं। सेंक्च्युरी के गैंडे अक्सर लग्गा-भग्गा व आसपास के जंगलों में घूमते रहते हैं। उनके गले में लगी ट्रांसमीटर चिप के सहारे सेंक्च्युरी के जवान स्थानीय वनकर्मियों के सहयोग से उन्हें ले जाते हैं।
इसके अलावा टूरिस्ट व पेट्रोलिंग के लिए हाथियों की मांग भी शामिल हैं।
इनको दी गई है जिम्मेदारी
टाइगर रिजर्व की 10 वर्षीय कार्ययोजना को मूर्त रूप देने के लिए जिले में तैनात रहे सेवानिवृत्त उपप्रभागीय वनाधिकारी राजाराम शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि सभी रेंजों के रेंजर भी अपनी जरूरी राय और अपनी-अपनी रेंजों की कार्ययोजना बनाकर देंगे।
टाइगर रिजर्व में तैनात होगा वेटनरी चिकित्सक
माधोटांडा। टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के उपचार, बाघों को बेहोश (ट्रंकुलाइज) करने व मृत होने की दशा में पोस्टमार्टम करने को एक वेटनरी चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी (एनटीसीए) ने इसको लेकर हरी झंडी दे दी है।
स्थानीय वन विभाग ने बाघ को बेहोश करने को अपने विभाग के चुनिंदा वन दरोगाओं को बाहर भेजकर प्रशिक्षण दिलाया है, लेकिन अभी तक कोई वेटनरी चिकित्सक को तैनात नहीं किया गया था। अब टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी की संस्तुति के बाद डीएफओ को वेटनरी चिकित्सक के नियुक्ति के आदेश दिए गए हैं। डीएफओ कैलाश प्रसाद ने बताया कि वेटनरी चिकित्सक की शीघ्र ही तैनाती की जाएगी।